Sunday, August 9, 2026
Sunday, August 9, 2026
Home विदेशचीन के संभावित हमले से निपटने की तैयारी में ताइवान, ड्रोन से बनाएगा ‘हेलस्केप’

चीन के संभावित हमले से निपटने की तैयारी में ताइवान, ड्रोन से बनाएगा ‘हेलस्केप’

by Sagar Sharma
0 comments

डिजिटल डेस्क, ताइपे: चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच ताइवान ने अपनी रक्षा रणनीति को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। संभावित चीनी हमले की स्थिति में जवाब देने के लिए ताइवान ड्रोन और अन्य मानवरहित हथियारों पर बड़ा दांव लगा रहा है। इस रणनीति के पीछे रूस-यूक्रेन युद्ध से मिले अनुभवों को भी अहम माना जा रहा है, जहां ड्रोन युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।

द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान का लक्ष्य अपने आसपास एक ऐसा ‘ड्रोन हेलस्केप’ तैयार करना है, जिसके जरिए चीनी सेना की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। इसके तहत ड्रोन का इस्तेमाल दुश्मन की स्थिति का पता लगाने, उसकी गतिविधियों की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर उसके आगे बढ़ने से पहले कार्रवाई करने के लिए किया जाएगा।

ताइवान के लेफ्टिनेंट जनरल हुआंग वेन-ची के मुताबिक, देश ने ड्रोन और काउंटर-ड्रोन क्षमताओं पर काम अपेक्षाकृत देर से शुरू किया था। अब इन्हें सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है।

सैन्य अभ्यास में ड्रोन पर जोर

आधारित रणनीति को शामिल किया गया है। अभ्यास के दौरान सैनिकों को निगरानी के लिए ड्रोन संचालित करने के साथ-साथ दुश्मन के ड्रोन की पहचान करने और उन्हें निष्क्रिय करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।यूक्रेन युद्ध में कम लागत वाले ड्रोन ने बड़ी सैन्य ताकत के खिलाफ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ताइवान भी चीन की विशाल सैन्य क्षमता के सामने इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल कर अपनी रक्षा को मजबूत करना चाहता है।

ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनने की तैयारी

ताइवान सिर्फ सैन्य इस्तेमाल तक सीमित नहीं रहना चाहता। सरकार की योजना 2030 तक हर महीने करीब 1 लाख ड्रोन बनाने की है, जिनमें लगभग आधे निर्यात किए जाएंगे। इसके अलावा, सेना के लिए 2.10 लाख से ज्यादा हवाई और समुद्री ड्रोन हासिल करने की योजना है।

ताइवान ने ड्रोन क्षेत्र में निवेश बढ़ाते हुए अगले पांच वर्षों में करीब 6.5 अरब डॉलर खर्च करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही सैन्य ढांचे में भी बदलाव किए जा रहे हैं, ताकि ड्रोन, मोबाइल मिसाइल और तोपखाने जैसी क्षमताओं को एक साथ इस्तेमाल किया जा सके।

चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और द्वीप के आसपास लगातार सैन्य गतिविधियां बढ़ा रहा है। ऐसे में ताइवान की ‘हेलस्केप’ रणनीति को संभावित संघर्ष की स्थिति में अपनी सीमित सैन्य क्षमता को तकनीक के जरिए मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

You may also like