नई दिल्ली: IPO में निवेश के लिए आवेदन करते समय बैंक की एक गलती निवेशक को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे ही एक मामले में गुजरात राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बैंक ऑफ बड़ौदा की सेवा में कमी मानते हुए अहमदाबाद की एक महिला को ₹37,000 मुआवजा देने का निर्देश दिया है। हालांकि, आयोग ने महिला की ₹40 लाख मुआवजे की मांग खारिज कर दी।
मामला अदाणी विल्मर के IPO से जुड़ा है। महिला ने 130 शेयरों के लिए आवेदन किया था, लेकिन बैंक की ओर से केवल 65 शेयरों की ही एंट्री की गई। महिला का कहना था कि इस गलती के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ।
क्या है पूरा मामला?
अहमदाबाद निवासी अनुराधा जोशी ने फरवरी 2022 में बैंक ऑफ बड़ौदा के माध्यम से अदाणी विल्मर IPO में 130 शेयरों के लिए आवेदन किया था। आरोप के मुताबिक, बैंक ने आवेदन में गलती से केवल 65 शेयर दर्ज किए।
महिला की ओर से उनके पति ने दलील दी कि खाते में आवेदन के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध थी और बैंक की गलती के कारण आवेदन सही तरीके से दर्ज नहीं हो पाया। उन्होंने यह भी कहा कि बैंक केवल इसे टाइपिंग या क्लेरिकल गलती बताकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक ने अपने आधिकारिक पत्राचार में एंट्री की गलती स्वीकार की थी।
बैंक ने क्या दलील दी?
बैंक की ओर से तर्क दिया गया कि शेयरों में निवेश लाभ कमाने के उद्देश्य से किया गया व्यावसायिक लेनदेन है। इसलिए बैंक ने सवाल उठाया कि क्या इस मामले में महिला को उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत राहत मिलनी चाहिए।
अहमदाबाद जिला उपभोक्ता आयोग ने पहले उनकी शिकायत खारिज कर दी थी। इसके बाद महिला ने गुजरात राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अपील की।
राज्य आयोग ने क्यों दिया ₹37,000 का मुआवजा?
राज्य आयोग ने माना कि बैंक की सेवा का लाभ लेने वाली महिला केवल इसलिए उपभोक्ता संरक्षण से बाहर नहीं हो जातीं क्योंकि उन्होंने बैंक को सीधे भुगतान नहीं किया था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि IPO से जुड़ा हर बैंकिंग विवाद केवल शेयरों में निवेश होने के कारण व्यावसायिक विवाद नहीं माना जा सकता।
आयोग ने बैंक की ओर से आवेदन में गलत संख्या दर्ज किए जाने को सेवा में कमी माना। उसके अनुसार, बैंकिंग संस्थानों को ग्राहकों के आवेदन और उनसे जुड़ी जानकारी दर्ज करते समय उचित सावधानी और सटीकता बरतनी चाहिए।
₹40 लाख का दावा क्यों खारिज हुआ?
महिला ने दावा किया था कि बैंक की गलती के कारण उन्हें ₹42,142 का नुकसान हुआ और उन्होंने ₹40 लाख मुआवजे की मांग की थी। हालांकि, आयोग ने माना कि यह साबित नहीं हुआ कि सही आवेदन दर्ज होने पर उन्हें निश्चित रूप से सभी 130 शेयर मिल जाते।
IPO में शेयरों का आवंटन तय प्रक्रिया और सब्सक्रिप्शन अनुपात पर निर्भर करता है। इसलिए केवल आवेदन में 130 शेयर दर्ज होने के आधार पर यह मान लेना उचित नहीं था कि सभी शेयर आवंटित हो ही जाते।
इसी वजह से आयोग ने ₹42,142 के कथित वित्तीय नुकसान को स्वीकार नहीं किया और ₹40 लाख की मांग को अत्यधिक बताते हुए खारिज कर दिया।
महिला को किस मद में मिलेगा मुआवजा?
गुजरात राज्य उपभोक्ता आयोग ने कुल ₹37,000 भुगतान करने का निर्देश दिया। इसका विवरण इस प्रकार है:
- ₹20,000: बैंकिंग सेवा में कमी के लिए
- ₹10,000: मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए
- ₹7,000: मूल शिकायत और अपील के कानूनी खर्च के लिए
यह फैसला बैंकिंग सेवाओं में सही डेटा एंट्री और ग्राहकों के आवेदनों को सावधानी से प्रोसेस करने की जिम्मेदारी को रेखांकित करता है। साथ ही, यह भी स्पष्ट करता है कि मुआवजे के लिए सेवा में कमी के साथ-साथ दावा किए गए वास्तविक आर्थिक नुकसान को भी पर्याप्त सबूतों से साबित करना जरूरी हो सकता है।
