वॉशिंगटन: अमेरिका में विदेशी पेशेवरों के लिए रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। व्हाइट हाउस के नियामकीय समीक्षा कार्यालय ने PERM इमिग्रेंट वीजा कार्यक्रम को आधुनिक बनाने से जुड़े प्रस्ताव की समीक्षा 23 अक्टूबर 2026 को पूरी कर ली। इस घटनाक्रम से उन भारतीय पेशेवरों और कंपनियों का ध्यान इस प्रक्रिया पर केंद्रित हो गया है, जो अमेरिकी रोजगार के माध्यम से स्थायी निवास प्राप्त करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, प्रस्ताव के विस्तृत नियम अभी सार्वजनिक होने बाकी हैं।
क्या है PERM कार्यक्रम और क्यों है महत्वपूर्ण?
PERM अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके तहत नियोक्ता को यह प्रदर्शित करना होता है कि संबंधित पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन तथा कार्यस्थितियों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
यह प्रक्रिया विशेष रूप से EB-2 और EB-3 श्रेणियों के तहत स्थायी निवास के लिए आवेदन करने वाले कई विदेशी पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण होती है। भारतीय आईटी विशेषज्ञों, इंजीनियरों और अन्य कुशल कर्मचारियों के लिए भी इसका खास महत्व है, क्योंकि अनेक लोग अमेरिकी कंपनियों के माध्यम से ग्रीन कार्ड प्रायोजन प्राप्त करते हैं।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
प्रस्तावित बदलावों का एक प्रमुख उद्देश्य अमेरिकी श्रम बाजार की जांच प्रक्रिया को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप बनाना है। अमेरिकी श्रम विभाग के नियामकीय एजेंडे में योग्य अमेरिकी कर्मचारियों की भर्ती के न्यूनतम मानकों को आधुनिक बनाने की बात कही गई है।
इसके अलावा, भर्ती के दौरान गैर-भेदभाव संबंधी नियमों के पालन को मजबूत करने और नियोक्ताओं के लिए आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखने की शर्तों को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जा सकता है। इन बदलावों से यह सुनिश्चित करने का प्रयास होगा कि विदेशी कर्मचारियों को प्रायोजित करने से पहले कंपनियां निर्धारित भर्ती प्रक्रिया का उचित पालन करें।
छंटनी करने वाली कंपनियों पर बढ़ सकती है निगरानी
PERM व्यवस्था में संभावित बदलावों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी से जुड़ी सुरक्षा को मजबूत करना है। प्रस्ताव में उन परिस्थितियों से संबंधित नियमों को सख्त करने की योजना है, जिनमें कंपनियां कर्मचारियों की छंटनी के बाद उसी तरह के पदों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना चाहती हैं।
इसका उद्देश्य अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी प्रतिभाओं की भर्ती वास्तविक कौशल की जरूरतों के आधार पर हो। हालांकि, प्रस्ताव का पूरा पाठ सार्वजनिक होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कंपनियों के लिए कौन-सी अतिरिक्त शर्तें लागू करने की योजना है।
भारतीय पेशेवरों और आईटी कंपनियों पर क्या होगा असर?
भारत से बड़ी संख्या में कुशल पेशेवर अमेरिकी तकनीकी और अन्य क्षेत्रों में काम करते हैं। ऐसे में PERM प्रक्रिया में बदलाव का प्रभाव उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो अपने नियोक्ता के माध्यम से स्थायी निवास के लिए आवेदन करने की तैयारी में हैं।
यदि भर्ती संबंधी शर्तें अधिक विस्तृत होती हैं, तो कंपनियों को विज्ञापन, उम्मीदवारों की जांच और दस्तावेजी रिकॉर्ड तैयार करने में अतिरिक्त समय और संसाधन लगाने पड़ सकते हैं। इससे कुछ मामलों में ग्रीन कार्ड प्रायोजन की प्रक्रिया अधिक जटिल हो सकती है। दूसरी ओर, नए नियमों का उद्देश्य वास्तविक श्रम जरूरतों और कर्मचारियों के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करना भी है।
अब आगे क्या होगा?
समीक्षा पूरी होने के बाद अगला महत्वपूर्ण कदम प्रस्ताव का सार्वजनिक प्रकाशन और उस पर आम लोगों तथा संबंधित पक्षों की टिप्पणियां आमंत्रित करना होगा। इसके बाद प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार करके अंतिम नियम तैयार किए जा सकते हैं।
जब तक अंतिम नियम जारी होकर प्रभावी नहीं होते, मौजूदा नियमों को ही लागू माना जाएगा। इसलिए भारतीय पेशेवरों और अमेरिकी कंपनियों को आधिकारिक घोषणा तथा संभावित समयसीमा पर नजर रखनी चाहिए। फिलहाल यह घटनाक्रम अमेरिकी रोजगार आधारित आव्रजन व्यवस्था में संभावित बड़े बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन विस्तृत नियम सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।
