नई दिल्ली: भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (BFI) के अध्यक्ष अजय सिंह ने महासंघ के महासचिव प्रमोद कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं, जांच में सहयोग नहीं करने और अधिकारों के कथित दुरुपयोग से जुड़े आरोपों के बाद की गई है। महासंघ के अनुसार, जांच पूरी होने तक निलंबन लागू रहेगा। हालांकि, आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं है।
प्रसारण समझौते को लेकर उठे सवाल
निलंबन आदेश में नवंबर 2025 में ग्रेटर नोएडा में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग फाइनल्स कप के प्रसारण से जुड़ा मामला प्रमुखता से उठाया गया है। आदेश के मुताबिक, पिनैकल ब्रॉडकास्ट प्रोडक्शंस ने प्रसारण सेवाओं के लिए लगभग 1.5 करोड़ रुपये का दावा किया है।
प्रमोद कुमार ने पहले अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा था कि कंपनी ने टूर्नामेंट के प्रायोजन और प्रसारण के लिए 2 करोड़ रुपये देने का आश्वासन दिया था। हालांकि, कंपनी ने ऐसे किसी आश्वासन से इनकार किया है। आदेश में यह भी आरोप लगाया गया है कि जरूरी मंजूरी के बिना प्रसारण से संबंधित वर्क ऑर्डर जारी किया गया था।
राष्ट्रीय चैंपियनशिप रद्द होने की भी जांच
महासंघ ने हिमाचल प्रदेश के नाहन में प्रस्तावित एलीट पुरुष एवं महिला ओपन बॉक्सिंग चैंपियनशिप रद्द होने के मामले को भी निलंबन के आधारों में शामिल किया है। यह प्रतियोगिता 16 से 23 अगस्त के बीच आयोजित होनी थी।
आदेश के अनुसार, इस मामले की जांच के लिए 17 अगस्त को समिति गठित की गई थी। प्रमोद कुमार पर समिति के नोटिस और सवालों का समय पर जवाब नहीं देने का आरोप लगाया गया है।
अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर विवाद
BFI में विवाद उस समय और बढ़ गया, जब प्रमोद कुमार ने 28 अक्टूबर को विशेष आम बैठक (SGM) बुलाने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया था कि अध्यक्ष अजय सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए उन्हें संबद्ध राज्य इकाइयों के बहुमत का समर्थन प्राप्त है।
अजय सिंह के आदेश में आरोप लगाया गया है कि आवश्यक मंजूरी के बिना बैठक बुलाने और महासंघ के अधिकारियों को नोटिस जारी करने का अधिकार प्रमोद कुमार के पास नहीं था।
निलंबन से एक दिन पहले प्रधानमंत्री को लिखा था पत्र
निलंबन की कार्रवाई से एक दिन पहले प्रमोद कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अजय सिंह और BFI के कार्यकारी निदेशक कर्नल अरुण मलिक पर कथित तौर पर धमकाने का आरोप लगाया था। यह आरोप प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ा था। कर्नल अरुण मलिक ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया था।
निलंबन आदेश के तहत प्रमोद कुमार को महासचिव के रूप में काम करने और महासंघ की ओर से आधिकारिक पत्राचार करने से रोका गया है।
जांच के नतीजों पर रहेगी नजर
BFI का कहना है कि निलंबन एक अंतरिम कदम है और आरोपों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। फिलहाल, प्रमोद कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जांच के नतीजे और महासंघ के भीतर चल रहा नेतृत्व विवाद भारतीय मुक्केबाजी प्रशासन के लिए अहम रहेंगे।
