Wednesday, October 28, 2026
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शेयर बाजार में शुरुआती बिकवाली से हड़कंप, सेंसेक्स 500 अंक टूटा; निफ्टी 22,450 के नीचे फिसला

by Sagar Sharma
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भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को कारोबार की शुरुआत दबाव के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक गिर गया, जबकि निफ्टी 50 फिसलकर 22,450 के स्तर से नीचे पहुंच गया। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। हालांकि, शुरुआती गिरावट के बाद बाजार में कुछ सुधार भी देखने को मिला।

बाजार में गिरावट के पीछे क्या रहे प्रमुख कारण?

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारक रहे। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए चिंता का विषय हैं। तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ सकता है, कंपनियों की लागत पर दबाव पड़ सकता है और महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा हो सकती है।

इसके अलावा, पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी ब्याज दर संबंधी घोषणा को लेकर निवेशक सतर्क बने हुए हैं। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले शेयरों में खरीदारी करने से बच सकते हैं, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ता है।

सेंसेक्स और निफ्टी का कैसा रहा प्रदर्शन?

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक गिरकर करीब 72,600 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 50 लगभग 22,405 के स्तर तक फिसल गया। इससे बाजार में बिकवाली का दबाव स्पष्ट हुआ।हालांकि, गिरावट के बाद प्रमुख सूचकांकों में कुछ सुधार दर्ज किया गया। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी अपने शुरुआती निचले स्तरों से ऊपर लौटते नजर आए। इससे संकेत मिला कि निचले स्तरों पर कुछ शेयरों में खरीदारी भी हुई।

ध्यान देने वाली बात यह है कि शुरुआती कारोबार के आंकड़े पूरे दिन के प्रदर्शन या बाजार बंद होने के अंतिम स्तर को नहीं दर्शाते।

IT शेयरों पर दबाव, कुछ कंपनियों में खरीदारी

आईटी क्षेत्र के शेयरों में कमजोरी ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। इन्फोसिस में गिरावट के साथ कुछ अन्य प्रमुख कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। वहीं, दूसरी ओर डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे शेयरों में मजबूती देखने को मिली।इस तरह अलग-अलग क्षेत्रों में मिला-जुला रुझान दिखाई दिया। इससे स्पष्ट हुआ कि बाजार की गिरावट के बावजूद सभी शेयरों में एक जैसी बिकवाली नहीं हुई। निवेशक कंपनियों के तिमाही नतीजों, कारोबार की संभावनाओं और वैश्विक घटनाक्रमों के आधार पर अपने फैसले ले रहे हैं।

निवेशकों की नजर अब किन संकेतों पर?

आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले, पश्चिम एशिया की स्थिति और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बाजार की दिशा निर्भर कर सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में सुधार होता है, तो बाजार को सहारा मिल सकता है। इसके विपरीत, तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक अनिश्चितता बिकवाली को बढ़ा सकती है।निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल एक दिन की गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसले न लें। शेयर खरीदने या बेचने से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, मूल्यांकन और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए।

क्या बाजार में फिर लौट सकती है तेजी?

शुरुआती गिरावट के बाद बाजार में आई रिकवरी से पता चलता है कि कुछ स्तरों पर खरीदारी का समर्थन मौजूद था। लेकिन स्थायी तेजी के लिए मजबूत खरीदारी और सकारात्मक वैश्विक संकेत जरूरी होंगे।

कुल मिलाकर, 26 अक्टूबर के शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार दबाव में रहा, लेकिन बाद में कुछ सुधार भी देखने को मिला। निवेशकों को पूरे कारोबारी सत्र के आंकड़ों और बाजार बंद होने के स्तर का इंतजार करना चाहिए, ताकि बाजार की वास्तविक दिशा का बेहतर आकलन किया जा सके।

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