तेलंगाना की कांग्रेस सरकार में मंत्री कोंडा सुरेखा से जुड़ा विवाद अब पार्टी के अंदरूनी अनुशासन तक पहुंच गया है। मामला उनके पूर्व OSD एन. सुमंथ पर लगे गंभीर आरोपों से शुरू हुआ और बाद में मंत्री की बेटी कोंडा सुष्मिता के बयानों ने इसे राजनीतिक विवाद में बदल दिया। पुलिस के मंत्री आवास पहुंचने, परिवार और अधिकारियों के बीच टकराव तथा मुख्यमंत्री समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर लगाए गए आरोपों के बाद पार्टी नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लिया। कांग्रेस नेतृत्व ने सुष्मिता के बयानों को लेकर कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाया है।
पूर्व OSD सुमंथ पर क्या आरोप हैं?
विवाद की शुरुआत कोंडा सुरेखा के OSD रहे एन. सुमंथ को पद से हटाए जाने के बाद हुई। उन पर एक निजी कंपनी के अधिकारी से कथित तौर पर पैसे ऐंठने और बंदूक दिखाकर धमकाने के आरोप लगाए गए। रिपोर्टों के अनुसार, मामला डेक्कन सीमेंट्स से जुड़े एक अधिकारी की शिकायत और कथित जबरन वसूली के आरोपों से जुड़ा था।
सरकार द्वारा सुमंथ की सेवाएं समाप्त किए जाने के बाद पुलिस उनकी तलाश में जुटी। इसी दौरान पुलिस की एक टास्क फोर्स टीम हैदराबाद स्थित कोंडा सुरेखा के आवास पहुंची, क्योंकि सूचना मिली थी कि सुमंथ वहां मौजूद हो सकते हैं।
मंत्री के घर पहुंची पुलिस तो बढ़ा विवाद
पुलिस के मंत्री आवास पहुंचने के बाद मामला अचानक राजनीतिक रंग लेने लगा। कोंडा सुरेखा की बेटी सुष्मिता ने पुलिस अधिकारियों से सवाल किया और सुमंथ को हिरासत में लेने की कोशिश का विरोध किया। उन्होंने अधिकारियों से कार्रवाई और कथित वारंट से जुड़े सवाल पूछे।
इसके बाद सुष्मिता ने मीडिया के सामने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर उनके परिवार को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उनके माता-पिता के खिलाफ साजिश की जा रही है। हालांकि, ये आरोप सुष्मिता के दावे थे और संबंधित नेताओं की ओर से इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया।
विवाद के पीछे पुरानी राजनीतिक खींचतान भी?
इस पूरे घटनाक्रम को तेलंगाना कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान से भी जोड़कर देखा गया। रिपोर्टों के मुताबिक, कोंडा सुरेखा और राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी के बीच मेदाराम से जुड़े करीब 71 करोड़ रुपये के कार्यों के ठेके को लेकर मतभेद सामने आए थे। सुरेखा ने आरोप लगाया था कि उनके विभाग से जुड़े कामों में उनकी सहमति के बिना हस्तक्षेप किया गया।
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच OSD प्रकरण सामने आने से कांग्रेस के भीतर तनाव और ज्यादा चर्चा में आ गया।
बेटी के बयान से बढ़ा कांग्रेस पर दबाव
सुष्मिता के सार्वजनिक बयानों ने पार्टी नेतृत्व के लिए नई मुश्किल खड़ी कर दी। उन्होंने मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस के लिए समस्या यह थी कि ये बयान किसी विपक्षी नेता की ओर से नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल की ही मंत्री के परिवार की ओर से आए थे।
पार्टी नेतृत्व ने पूरे मामले को अनुशासन के नजरिए से देखना शुरू किया। तेलंगाना कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि पार्टी में सार्वजनिक रूप से वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आरोप लगाने और संगठनात्मक अनुशासन तोड़ने को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
कोंडा सुरेखा ने बाद में क्या किया?
विवाद बढ़ने के बाद कोंडा सुरेखा ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से मुलाकात की और अपनी बेटी के बयानों से दूरी बनाई। उन्होंने बाद में मुख्यमंत्री से माफी भी मांगी और पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस परिवार के भीतर गलतफहमी से पैदा हुआ विवाद बताया। सुरेखा ने अपनी बेटी की टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए उनसे खुद को अलग किया।
इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने भी मामले को शांत करने और दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझाने की कोशिश की। मुख्यमंत्री की ओर से भी सुरेखा और उनके परिवार को विवाद से दूर रहने की सलाह दिए जाने की खबरें सामने आईं।
अब आगे क्या?
यह विवाद केवल एक पूर्व OSD के खिलाफ पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। इसमें मंत्री के परिवार, पुलिस कार्रवाई, कथित राजनीतिक साजिश के आरोप और कांग्रेस के आंतरिक अनुशासन जैसे कई मुद्दे जुड़ गए हैं।
अब पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मामले को आगे बढ़ाते हुए सरकार की छवि और संगठनात्मक एकता दोनों को कैसे बनाए रखा जाए। वहीं, सुमंथ के खिलाफ लगे आरोपों की कानूनी जांच अपनी जगह जारी रहना महत्वपूर्ण है। कुल मिलाकर, कोंडा सुरेखा प्रकरण ने तेलंगाना कांग्रेस के भीतर सत्ता, संगठन और नेताओं के बीच बढ़ते तनाव को एक बार फिर सार्वजनिक कर दिया है।
