रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़े विवाद अब दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंचते नजर आ रहे हैं। आजम खान के समर्थकों ने रविवार, 30 अगस्त 2026, को जंतर-मंतर पर तीन घंटे के शांतिपूर्ण आंदोलन का आह्वान किया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्ट के मुताबिक प्रदर्शन सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक प्रस्तावित है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इन वायरल पोस्टों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है
रविवार को जंतर-मंतर पर जुटने की अपील
आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से जुड़े सोशल मीडिया समर्थक पेजों के अलावा पूर्व सपा विधायक अरशद खान से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स से भी प्रदर्शन को लेकर पोस्ट साझा की गई हैं। इन पोस्टों में समर्थकों से अधिक से अधिक संख्या में जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की गई है।
आयोजकों की ओर से इसे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शन बताया गया है। पोस्टों में न्याय, अधिकार, शिक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े मुद्दों को उठाने की बात कही गई है। समर्थकों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि अपनी मांगों और शिकायतों को सार्वजनिक रूप से सामने रखना है।
जौहर यूनिवर्सिटी पर 38 इमारतों का मामला
इस पूरे विवाद की बड़ी वजह रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी में बने 38 भवनों को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई है। रामपुर विकास प्राधिकरण ने इन भवनों के निर्माण के लिए स्वीकृत नक्शे से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठाते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था।
रिपोर्टों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी प्रबंधन को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। इसके बाद प्राधिकरण ने कार्रवाई का आदेश पारित किया। हालांकि, बाद में मंडलायुक्त की ओर से ध्वस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगाए जाने से यूनिवर्सिटी को फिलहाल राहत मिली है। इसके बावजूद इन भवनों को लेकर कानूनी और प्रशासनिक विवाद बना हुआ है।
यूनिवर्सिटी के छात्र भी कर चुके हैं प्रदर्शन
ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद जौहर यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने भी परिसर के बाहर धरना-प्रदर्शन किया था। छात्रों की चिंता मुख्य रूप से उनकी पढ़ाई और भविष्य को लेकर बताई गई। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से ऐसा समाधान निकालने की मांग की, जिससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों।
आजम खान के समर्थक भी इस मामले को केवल इमारतों या प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं मान रहे हैं। उनके अनुसार, यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों का असर छात्रों और शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर प्रशासनिक पक्ष से कार्रवाई को नियमों और निर्माण स्वीकृतियों से जुड़े मामलों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
आजम खान और अब्दुल्ला से जुड़े मामले भी चर्चा में
आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम पहले से ही कई कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं। ड्यूल पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में दोनों को सजा हो चुकी है और वे जेल में हैं। इसी पृष्ठभूमि में जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है।
अब रविवार को प्रस्तावित जंतर-मंतर आंदोलन के जरिए समर्थक इस पूरे मुद्दे को राष्ट्रीय राजधानी तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। तीन घंटे का यह प्रदर्शन कितना बड़ा रूप लेता है और इसमें कौन-कौन से राजनीतिक या सामाजिक चेहरे शामिल होते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी। फिलहाल यह स्पष्ट है कि रामपुर से शुरू हुआ जौहर यूनिवर्सिटी विवाद अब दिल्ली के राजनीतिक केंद्र तक पहुंचने की दिशा में बढ़ रहा है।
