बिश्केक: किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान मंगलवार को दुनिया की नजरें उस वक्त टिक गईं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक साथ नजर आए। तीनों नेताओं के बीच हाथ मिलाने और कुछ देर बातचीत का वीडियो सामने आया है। इस दौरान तीनों के चेहरे पर सहजता और मुस्कान दिखाई दी।
एक फ्रेम में नजर आए तीनों बड़े नेता
SCO सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे नेताओं की आधिकारिक ग्रुप फोटो से पहले प्रधानमंत्री मोदी की शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात हुई। वीडियो में तीनों नेता एक-दूसरे का हाथ पकड़े और संक्षिप्त बातचीत करते दिखाई दिए। इसके बाद सभी नेता आधिकारिक ‘फैमिली फोटो’ के लिए एक साथ खड़े हुए
यह तस्वीर इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारत और चीन के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों से सीमा और रणनीतिक मुद्दों को लेकर तनाव रहा है। ऐसे में मोदी और शी जिनपिंग का सार्वजनिक रूप से हाथ मिलाना और बातचीत करना दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहने का संकेत माना जा रहा है। हालांकि, इस एक तस्वीर को किसी बड़े रणनीतिक बदलाव या औपचारिक गठबंधन के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी।
पुतिन के साथ मोदी की अहम बातचीत
SCO सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की थी। दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों के साथ व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, मोबिलिटी और दोनों देशों के बीच लोगों के संपर्क जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक के दौरान मोदी ने वैश्विक संघर्षों को खत्म करने के लिए संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने भारत-रूस की विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। पुतिन की सितंबर में भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के लिए प्रस्तावित यात्रा को लेकर भी चर्चा हुई।
SCO मंच से आतंकवाद पर मोदी का सख्त संदेश
SCO सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी देश की रणनीतिक नीति या संपत्ति के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और आतंकियों को मिलने वाली सुरक्षित पनाह के पूरे नेटवर्क को खत्म करने की जरूरत बताई।
मोदी ने यह भी कहा कि वैश्विक संघर्षों का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। उनका यह संदेश ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में गंभीर भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है।
क्या संकेत देती है मोदी-शी-पुतिन की तस्वीर?
बिश्केक से सामने आई यह तस्वीर निश्चित तौर पर कूटनीतिक रूप से काफी अहम है। भारत एक ओर रूस के साथ अपने पुराने रणनीतिक संबंधों को मजबूत कर रहा है, वहीं चीन के साथ भी संवाद के रास्ते खुले रखे हुए है। SCO जैसा बहुपक्षीय मंच भारत को दोनों देशों के साथ बातचीत करने और अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार स्वतंत्र विदेश नीति आगे बढ़ाने का अवसर देता है।
इसलिए मोदी, शी और पुतिन का यह हाथ मिलाना केवल एक औपचारिक तस्वीर नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति के बीच संवाद और कूटनीति की अहमियत को दिखाने वाला दृश्य भी माना जा रहा है।
