पाकिस्तान सरकार ने विदेशी मीडिया से जुड़े पत्रकारों के लिए नई रिपोर्टिंग गाइडलाइंस लागू की हैं, जिसके बाद प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है। पत्रकार संगठनों और मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि इन नियमों से देश के कई हिस्सों में स्वतंत्र और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत विदेशी मीडिया संस्थानों के लिए काम करने वाले पत्रकारों, फ्रीलांस रिपोर्टरों और पाकिस्तानी नागरिकों को इस्लामाबाद, कराची और लाहौर के अलावा किसी अन्य क्षेत्र से रिपोर्टिंग करने से पहले नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना होगा। आलोचकों का कहना है कि इससे ग्राउंड रिपोर्टिंग सरकारी अनुमति पर निर्भर हो जाएगी और खबरों के कवरेज में देरी हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषक मुस्तफा नवाज खोखर ने इन नियमों को प्रेस की स्वतंत्रता के लिए चिंता का विषय बताया। उनका कहना है कि जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टिंग सीमित होगी तो सत्यापित जानकारी की जगह अफवाहों और फर्जी खबरों के फैलने की संभावना बढ़ सकती है। उनका यह भी मानना है कि कई लोग निष्पक्ष जानकारी के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर भरोसा करते हैं।
दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि नई गाइडलाइंस का उद्देश्य मीडिया पर रोक लगाना नहीं, बल्कि विदेशी पत्रकारों के काम को व्यवस्थित करना और प्रशासनिक समन्वय बेहतर बनाना है। सरकार के मुताबिक यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिससे रिपोर्टिंग में पारदर्शिता और समन्वय बढ़ेगा।
नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई पत्रकार देश की संप्रभुता, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो उसका सरकारी एक्रेडिटेशन रद्द किया जा सकता है। इस प्रावधान को लेकर भी कानूनी विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं और कहा है कि इसकी व्याख्या काफी व्यापक और अस्पष्ट है।
इधर, डॉन अखबार के संपादक जफर अब्बास और कई वरिष्ठ पत्रकारों ने इन नियमों का विरोध करते हुए कहा कि इस तरह की पाबंदियां पत्रकारों की स्वतंत्र आवाजाही और निष्पक्ष रिपोर्टिंग दोनों को प्रभावित करेंगी। वहीं अंतरराष्ट्रीय पत्रकार संगठनों ने पाकिस्तान सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने और प्रेस की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की अपील की है।
