Sunday, August 9, 2026
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क्या 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर लगेगा चार्ज? संसद में पेश विधेयक के बाद बढ़ी चर्चा

by Sagar Sharma
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देश में डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के बीच उस समय नई चर्चा शुरू हो गई, जब संसद में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संशोधन से जुड़ा विधेयक पेश किया गया। इस प्रस्ताव के बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि भविष्य में कुछ श्रेणी के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जा सकता है। हालांकि, सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि शुल्क कब, कितना और किन लेनदेन पर लागू होगा।

जानकारी के मुताबिक, यह संशोधन डिजिटल भुगतान पर एमडीआर लगाने के लिए कानूनी आधार तैयार कर सकता है। एमडीआर वह शुल्क होता है, जो व्यापारी डिजिटल भुगतान की सुविधा देने के बदले बैंक और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को चुकाते हैं। फिलहाल यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड के अधिकांश लेनदेन पर यह शुल्क नहीं लिया जाता।

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी संकेत दिए थे कि देश के तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान नेटवर्क को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए किसी न किसी वित्तीय व्यवस्था की आवश्यकता होगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में शुरुआत में बड़े कारोबारियों और 2,000 रुपये से अधिक के कुछ लेनदेन को शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में सरकार या रिजर्व बैंक की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कांग्रेस ने संभावित शुल्क को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा, जबकि बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि विधेयक के पूरे प्रावधान सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। उनका मानना है कि यदि किसी नई सुविधा के लिए मामूली शुल्क लिया जाता है तो उस पर विचार किया जा सकता है।

सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर बहस तेज हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यूपीआई पर एमडीआर लागू किया गया, तो व्यापारी इसकी लागत ग्राहकों पर डाल सकते हैं, जिससे नकद भुगतान की ओर वापसी का रुझान बढ़ सकता है। वहीं कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यूपीआई जैसी सफल डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए इसे शुल्क मुक्त बनाए रखना अधिक उचित होगा।

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