Sunday, August 9, 2026
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टेक्सास की जमीन के नीचे दफन है अमेरिका का अधूरा साइंस प्रोजेक्ट, 22.5 किमी सुरंग पर खर्च हुए अरबों डॉलर

by Sagar Sharma
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अमेरिका के टेक्सास राज्य की जमीन के नीचे करीब 22.5 किलोमीटर लंबी सुरंग आज भी एक ऐसे वैज्ञानिक सपने की गवाही देती है, जो कभी पूरा नहीं हो सका। यह सुरंग सुपरकंडक्टिंग सुपर कोलाइडर (SSC) परियोजना का हिस्सा थी, जिसे दुनिया का सबसे शक्तिशाली पार्टिकल एक्सेलेरेटर बनाने की योजना के तहत शुरू किया गया था। यदि यह परियोजना पूरी हो जाती तो कण भौतिकी (पार्टिकल फिजिक्स) के क्षेत्र में नई क्रांति आ सकती थी।इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्रस्ताव 1983 में रखा गया था और 1991 में इसका निर्माण शुरू हुआ। योजना के तहत टेक्सास के एलिस काउंटी के नीचे लगभग 87 किलोमीटर लंबी गोलाकार सुरंग बनाई जानी थी, जिसमें प्रोटॉन कणों को बेहद उच्च ऊर्जा पर आपस में टकराकर ब्रह्मांड और पदार्थ की मूल संरचना का अध्ययन किया जाना था।हालांकि, निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही यह परियोजना आर्थिक संकट का शिकार हो गई। वर्ष 1993 में अमेरिकी कांग्रेस ने इसकी फंडिंग रोक दी। तब तक इस पर करीब 2 अरब डॉलर खर्च हो चुके थे और 22.5 किलोमीटर सुरंग, 17 गहरे एक्सेस शाफ्ट तथा कई सहायक इमारतों का निर्माण पूरा हो चुका था। लेकिन मुख्य उपकरण, मैग्नेट और वैज्ञानिक डिटेक्टर कभी स्थापित नहीं किए जा सके।शुरुआती अनुमान के मुताबिक इस परियोजना की लागत 4.4 अरब डॉलर थी, लेकिन समय के साथ यह बढ़कर करीब 11 अरब डॉलर तक पहुंच गई। तकनीकी बदलाव, बढ़ती निर्माण लागत और प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों ने परियोजना पर भारी वित्तीय दबाव डाल दिया। इसी वजह से सरकार ने इसे बीच में ही बंद करने का फैसला लिया।परियोजना को अंतरराष्ट्रीय सहयोग से पूरा करने की भी योजना थी। भारत सहित कई देशों से सहयोग की उम्मीद जताई गई थी और भारत ने समर्थन का आश्वासन भी दिया था। हालांकि, अपेक्षित वैश्विक निवेश नहीं मिल पाया। दूसरी ओर, कई यूरोपीय देश पहले से ही CERN जैसी परियोजनाओं में निवेश कर रहे थे, जिससे SSC को पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिल सका।आज तीन दशक बाद भी टेक्सास की जमीन के नीचे बनी ये सुरंगें मौजूद हैं। हालांकि इनमें पानी भर चुका है और इन्हें सील कर दिया गया है। जमीन के ऊपर इस विशाल परियोजना के बहुत कम निशान दिखाई देते हैं, लेकिन भूमिगत सुरंगें आज भी उस अधूरे वैज्ञानिक मिशन की याद दिलाती हैं, जिससे दुनिया को भौतिकी के क्षेत्र में बड़ी उम्मीदें थीं।

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