पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ शोएब अख्तर केवल अपनी रफ्तार के लिए ही नहीं, बल्कि विवादों और बेबाक अंदाज़ के लिए भी जाने जाते हैं। अपनी आत्मकथा Controversially Yours में उन्होंने जीवन और क्रिकेट करियर से जुड़े कई ऐसे अनुभव साझा किए हैं, जिनमें संघर्ष, सफलता और विवाद तीनों की झलक मिलती है।रावलपिंडी के एक साधारण परिवार में जन्मे शोएब का बचपन आर्थिक कठिनाइयों के बीच बीता। बचपन में फेफड़ों की गंभीर बीमारी ने उनकी जिंदगी पर सवाल खड़े कर दिए थे। डॉक्टरों ने भी उम्मीद कम जताई थी, लेकिन उनकी मां ने इलाज जारी रखा। शोएब का कहना है कि वही कमजोर फेफड़े आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गए और उन्होंने दुनिया के सबसे तेज़ गेंदबाज़ों में अपनी पहचान बनाई।क्रिकेट में जगह बनाने के लिए भी उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। पीआईए के ट्रायल देने के लिए वह बेहद कम पैसों के साथ लाहौर पहुंचे और एक तांगा चालक की मदद से रात गुज़ारी। बाद में पाकिस्तान टीम में जगह बनाने के बाद उन्होंने उसी तांगा चालक से किया गया अपना वादा निभाया और उससे दोबारा मुलाकात की।आईपीएल के पहले सीज़न से जुड़ा एक किस्सा भी उन्होंने साझा किया। शोएब के मुताबिक़, कोलकाता नाइट राइडर्स से जुड़ने से पहले उनकी मुलाकात अभिनेता शाहरुख़ खान और तत्कालीन आईपीएल प्रमुख ललित मोदी से हुई थी। उनका दावा है कि कुछ आर्थिक आश्वासन दिए गए थे, लेकिन नीलामी के बाद उन्हें उम्मीद के मुताबिक़ सम्मान और भुगतान नहीं मिला। उनका कहना है कि उन्हें बाद में महसूस हुआ कि इन वादों पर भरोसा नहीं करना चाहिए था।इसी दौरान पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के साथ विवाद बढ़ने पर उन पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया गया, जिससे आईपीएल में उनका खेलना भी संकट में पड़ गया। शोएब के अनुसार, इस मुश्किल दौर में उन्होंने अपने एक मित्र के माध्यम से तत्कालीन राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और एमक्यूएम नेता अल्ताफ़ हुसैन से संपर्क किया। बाद में बातचीत के जरिए मामला सुलझा और प्रतिबंध हटने के बाद वह आईपीएल में खेल सके।शोएब ने अपनी किताब में ब्रायन लारा से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा, कराची में आतंकवादी हमले का अनुभव और फ़िल्म गैंगस्टर में काम करने का मिला प्रस्ताव ठुकराने की कहानी भी साझा की है। उनके मुताबिक़, क्रिकेट के बाहर भी उनकी ज़िंदगी उतनी ही रोमांचक रही, जितनी मैदान पर उनकी तेज़ रफ्तार गेंदबाज़ी।
शोएब अख्तर की जिंदगी के अनसुने किस्से: शाहरुख़ खान से क्यों हुए नाराज़, ज़रदारी और अल्ताफ़ हुसैन से क्यों मांगी मदद?
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