नई दिल्ली: बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों की मतगणना सोमवार को होगी। इन चुनावों को राजनीतिक लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि परीक्षा पेपर लीक के विरोध में देशभर में हुए छात्र आंदोलनों के बाद यह पहली चुनावी प्रक्रिया है। ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या इन आंदोलनों का असर मतदाताओं, खासकर युवाओं के रुझान पर पड़ा है।बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाती है। यह सीट बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी। चुनाव के दौरान पार्टी को उस समय झटका लगा, जब पहले घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने नामांकन दाखिल करने के बाद निजी कारणों का हवाला देकर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। इसके बाद बीजेपी ने युवा मोर्चा के नेता नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा। दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा गुप्ता पर भरोसा जताया है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि उनकी उम्मीदवार को सभी वर्गों का समर्थन मिला है। वहीं, प्रशांत किशोर की चुनावी सक्रियता ने भी इस सीट को चर्चा का केंद्र बना दिया।मध्य प्रदेश की दतिया सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के बाद खाली हुई थी। यहां बीजेपी ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस की ओर से पूर्व विधायक घनश्याम सिंह मैदान में हैं। दतिया को पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है, लेकिन इस बार उम्मीदवार बदलने के फैसले से उनके समर्थकों में नाराजगी देखी गई, जिसका असर चुनाव प्रचार के दौरान भी नजर आया।वहीं, गुजरात की मंजलपुर सीट बीजेपी विधायक योगेशभाई नारनदास पटेल के निधन के कारण रिक्त हुई। यहां बीजेपी ने पूर्व पार्षद सतीश गोविंदभाई पटेल को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व मंत्री भीखाभाई रबारी को उम्मीदवार बनाया है। मंजलपुर बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा है और 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने गुजरात में रिकॉर्ड 156 सीटों पर जीत दर्ज की थी।इन तीनों सीटों के नतीजे केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें छात्र आंदोलनों के बाद देश के राजनीतिक माहौल और युवा मतदाताओं की सोच के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
तीन बीजेपी शासित राज्यों के उपचुनावों की मतगणना आज, छात्र आंदोलन के बाद पहली चुनावी परीक्षा पर टिकी नजर
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