अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। भारत की ओर से राज्य के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक मानचित्र में मानकीकृत भारतीय नामों के साथ दर्ज किए जाने के बाद चीन ने इस कदम का विरोध किया है। बीजिंग ने भारत की इस पहल को एकतरफा बताते हुए इसे स्वीकार करने से इनकार किया है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि भारत की ओर से उन स्थानों के नाम बदलने की कोशिश, जिन्हें चीन लंबे समय से अलग नामों से संदर्भित करता रहा है, कथित तौर पर “गैर-कानूनी और अमान्य” है। बीजिंग ने अपने पुराने दावे को दोहराते हुए अरुणाचल प्रदेश को ‘जंगनान’ या ‘दक्षिणी तिब्बत’ के रूप में पेश किया।
भारत ने आधिकारिक नक्शे में दर्ज किए 27 स्थान
भारत ने 7 अगस्त को Survey of India के आधिकारिक मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों को उनके मानकीकृत नामों के साथ शामिल किया। इनमें अलग-अलग भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्व वाले क्षेत्र शामिल हैं। यह कदम चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की बार-बार की जा रही कोशिशों के बीच उठाया गया है।
भारत का रुख लगातार स्पष्ट रहा है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। विदेश मंत्रालय पहले भी चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र के स्थानों को नए नाम देने की कोशिशों को खारिज कर चुका है और कहा है कि काल्पनिक नाम देने से जमीन पर वास्तविकता नहीं बदलती।
चीन की सरकारी मीडिया ने भी उठाए सवाल
चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट में चीनी विशेषज्ञों ने भारत के इस कदम की आलोचना की। रिपोर्ट में दावा किया गया कि ऐसे एकतरफा कदम दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों के लिए मददगार नहीं हैं। चीनी विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि नाम बदलने से विवादित क्षेत्र की स्थिति पर कोई कानूनी प्रभाव नहीं पड़ता।
नाम बदलने की कवायद पर पुराना विवाद
अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने को लेकर भारत और चीन के बीच विवाद कई वर्षों से चला आ रहा है। चीन 2017 से अलग-अलग चरणों में अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के लिए अपने कथित मानकीकृत नाम जारी करता रहा है। भारत हर बार इन प्रयासों को खारिज करता रहा है।
अब भारत द्वारा 27 स्थानों को अपने आधिकारिक मानचित्र में दर्ज किए जाने और चीन की आपत्ति के बाद दोनों देशों के बीच सीमा विवाद से जुड़ी बयानबाजी फिर तेज हो गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देश लंबे समय से चले आ रहे सीमा तनाव के बाद द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिश भी कर रहे हैं।
