Sunday, August 9, 2026
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Home देशमोहन भागवत का युवाओं से संवाद: बोले- प्रदर्शन करने वाली जेन-ज़ी देश विरोधी नहीं, आरक्षण और LGBTQIA+ पर भी रखी राय

मोहन भागवत का युवाओं से संवाद: बोले- प्रदर्शन करने वाली जेन-ज़ी देश विरोधी नहीं, आरक्षण और LGBTQIA+ पर भी रखी राय

by Sagar Sharma
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जेन-ज़ी और जेन-अल्फ़ा पीढ़ी से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) के 15वें स्थापना दिवस समारोह में उन्होंने कहा कि युवाओं द्वारा उठाए जा रहे कई मुद्दे वास्तविक हैं और लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन अपनी बात रखने का एक वैध माध्यम है।

भागवत ने कहा कि किसी भी आंदोलन को देश विरोधी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि युवा किसी व्यवस्था या नीति के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं तो इसका अर्थ यह नहीं कि वे राष्ट्र विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद, बहस और सहमति की प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि बातचीत से समाधान नहीं निकलता, तब शांतिपूर्ण आंदोलन भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन उसका उद्देश्य समाज को जोड़ना होना चाहिए, तोड़ना नहीं।

उन्होंने हाल के छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई समस्याएं हैं, जिन पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। उनका मानना है कि नई पीढ़ी पहले की तुलना में अधिक सवाल पूछती है और हर विषय पर तर्कपूर्ण जवाब चाहती है। इसलिए युवाओं की बात सुनना और उनसे संवाद बनाए रखना जरूरी है।

आरक्षण के मुद्दे पर आरएसएस प्रमुख ने कहा कि जब तक समाज में भेदभाव और असमानता मौजूद है, तब तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक समानता स्थापित करना है, न कि इसे स्थायी व्यवस्था बनाना। उन्होंने इस विषय पर राजनीतिक लाभ लेने की प्रवृत्ति से बचने की भी सलाह दी

एलजीबीटीक्यूआईए+ समुदाय पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि यह समुदाय भी समाज का अभिन्न हिस्सा है और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।

हालांकि उन्होंने कहा कि वर्तमान विवाह व्यवस्था में बदलाव करने के बजाय समान लिंग वाले जोड़ों के लिए अलग कानूनी व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। उनके अनुसार, समाज को इस विषय पर धीरे-धीरे तैयार करने की जरूरत है ताकि सभी पक्षों के हितों का संतुलन बना रहे।

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