IBM India और South Asia के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप पटेल के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में भारतीय कंपनियों और सरकारी संस्थानों के लिए अपने डेटा, टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर नियंत्रण बनाए रखना अहम होता जा रहा है।
मुंबई: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के बीच डिजिटल संप्रभुता यानी Digital Sovereignty का मुद्दा महत्वपूर्ण हो रहा है। IBM India और South Asia के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप पटेल ने इसे ‘डिजिटल स्वराज’ का नाम देते हुए कहा कि कंपनियों और सरकारों को अपने डेटा, टेक्नोलॉजी संसाधनों और उन्हें संचालित करने वाले सिस्टम पर पर्याप्त नियंत्रण रखने की जरूरत है।
13 अक्टूबर को मुंबई में आयोजित IBM Think 2026 कार्यक्रम के दौरान सामने आए उनके विचारों के अनुसार, वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों और बदलते नियमों के कारण कंपनियां इस बात को लेकर अधिक सतर्क हैं कि उनका डेटा कहां रखा जाता है और उस पर नियंत्रण किसका है।
क्या है डिजिटल स्वराज?
डिजिटल स्वराज का मतलब केवल डेटा को भारत में स्टोर करना नहीं है। इसमें यह भी शामिल है कि डेटा को कौन नियंत्रित करता है, एन्क्रिप्शन कीज की जिम्मेदारी किसके पास है और किसी कंपनी का टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर लागू नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं।
बैंकिंग जैसे विनियमित क्षेत्रों में यह जरूरत और महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और नियमों का लगातार पालन करना आवश्यक होता है।
पटेल के अनुसार, संस्थानों को अपने कामकाज और नियामकीय जरूरतों के हिसाब से डिजिटल नियंत्रण का ऐसा स्तर चाहिए, जिससे वे तकनीक का इस्तेमाल करते हुए अपने संचालन पर नियंत्रण बनाए रख सकें।
IBM Sovereign Core और Bharat Core पर फोकस
IBM ने डिजिटल संप्रभुता से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए Sovereign Core सॉफ्टवेयर स्टैक विकसित किया है। इसे ग्राहक या पार्टनर के स्वामित्व वाले डेटा सेंटर में तैनात किया जा सकता है। इसका उद्देश्य क्लाउड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए कंट्रोल-प्लेन ऑपरेशन और प्रमुख सुरक्षा प्रक्रियाओं पर ग्राहक के अधिकार क्षेत्र में नियंत्रण बनाए रखना है।
कंपनी का IBM Bharat Core भारत की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया AI स्टैक है। इसमें भारतीय भाषाओं और अलग-अलग उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली AI सेवाओं, मॉडल और कनेक्टर्स पर फोकस किया गया है।
इस तरह के समाधान उन संस्थानों के लिए उपयोगी हो सकते हैं, जिन्हें AI अपनाने के साथ डेटा नियंत्रण, सुरक्षा और स्थानीय नियमों के अनुपालन का भी ध्यान रखना पड़ता है।
भारत में डेटा सेंटर निवेश को मिल सकता है बढ़ावा
पटेल के मुताबिक, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक नियंत्रण की जरूरत भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र की वृद्धि को भी समर्थन दे रही है। इसके पीछे दो प्रमुख वजहें हैं—वैश्विक कारोबार को सेवाएं देने के लिए कंपनियों का भारत में क्षमता विकसित करना और भारतीय कंपनियों का अपने नियंत्रण वाले डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करना।
AI के विस्तार के साथ डेटा की उपलब्धता, उसकी सुरक्षा और सही समय पर उसका इस्तेमाल भी अहम हो गया है। ऐसे में डेटा सेंटर, हाइब्रिड क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी सेवाओं की मांग पर असर पड़ सकता है।
IBM ने AI से उत्पादकता बढ़ाने का दावा किया
पटेल ने IBM के आंतरिक कामकाज में AI और ऑटोमेशन के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, कंपनी ने तीन साल में 2 अरब डॉलर की परिचालन बचत का लक्ष्य रखा था, लेकिन पिछले साल के अंत तक यह बचत 4.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई।
उन्होंने यह भी बताया कि IBM का AI कोडिंग एजेंट ‘Bob’ करीब 80,000 इंजीनियरों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है और कंपनी ने इससे 45 प्रतिशत उत्पादकता लाभ दर्ज करने की बात कही है।
ये आंकड़े IBM की ओर से साझा किए गए हैं और कंपनी के आंतरिक अनुभव को दर्शाते हैं।
AI के दौर में नियंत्रण और नवाचार दोनों अहम
भारत में AI के अवसर बढ़ने के साथ कंपनियों के सामने डेटा सुरक्षा, तकनीकी निर्भरता और नियमों के पालन जैसी चुनौतियां भी हैं। डिजिटल स्वराज की अवधारणा इसी जरूरत पर जोर देती है कि संस्थान AI और आधुनिक डिजिटल तकनीकों को अपनाते हुए अपने महत्वपूर्ण डेटा और सिस्टम पर उचित नियंत्रण बनाए रखें।
भारत के लिए चुनौती ऐसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करना है, जो नवाचार को बढ़ावा देने के साथ सुरक्षा, भरोसे और नियामकीय जरूरतों को भी पूरा कर सके।
