Friday, September 11, 2026
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मनुस्मृति में महिलाओं को लेकर क्या लिखा है? राहुल गांधी के बयान के बाद समझिए श्लोकों का सच

by Sagar Sharma
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कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 22 अगस्त 2026 को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की स्वतंत्रता और सामाजिक बराबरी का मुद्दा उठाते हुए मनुस्मृति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पुरुषों से जुड़े रिश्तों के आधार पर परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए और महिला स्वयं की है। राहुल गांधी ने पितृसत्तात्मक सोच को महिलाओं की स्वतंत्रता में बाधा बताते हुए इसे खत्म करने की बात कही।

उनके बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह सवाल चर्चा में है कि क्या मनुस्मृति में वास्तव में महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर ऐसे प्रावधान हैं? इसका जवाब समझने के लिए मनुस्मृति के संबंधित श्लोकों को उनके संदर्भ में देखना जरूरी है।

मनुस्मृति के किस श्लोक का दिया जाता है उदाहरण?

महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर सबसे अधिक चर्चा मनुस्मृति के अध्याय 5 के श्लोक 147-148 और अध्याय 9 के श्लोक 3 की होती है।

मनुस्मृति 5.148 में कहा गया है कि बचपन में महिला पिता के संरक्षण में, युवावस्था में पति के और पति की मृत्यु के बाद पुत्रों के संरक्षण में रहे तथा महिला को स्वतंत्र रूप से रहने की बात नहीं कही गई है। अलग-अलग अनुवादों में शब्दों की व्याख्या में अंतर दिखाई देता है, लेकिन श्लोक में महिला की स्वतंत्रता को लेकर स्पष्ट प्रतिबंधात्मक भाषा मौजूद है।

इसी तरह 9.3 में भी पिता, पति और पुत्र द्वारा महिला की रक्षा/देखभाल का उल्लेख किया गया है और महिला की स्वतंत्रता को लेकर प्रतिबंध की बात आती है। इस वजह से आधुनिक नजरिए से इन श्लोकों को महिलाओं की स्वायत्तता सीमित करने वाला माना जाता है।

क्या इसमें महिलाओं को केवल घर तक सीमित करने की बात है?

मनुस्मृति में महिलाओं के घरेलू दायित्वों का भी उल्लेख मिलता है। उदाहरण के तौर पर 5.148 के विस्तृत अनुवाद में महिला को घर के कामों में दक्ष और घरेलू व्यवस्था संभालने वाली भूमिका में बताया गया है।

वहीं 5.147 में पिता, पति या पुत्र से अलग होने की इच्छा न रखने की बात कही गई है और परिवार से अलगाव को दोनों परिवारों के लिए अपमानजनक बताया गया है।

इन श्लोकों को आधुनिक लैंगिक समानता के मानकों से देखें तो महिलाओं की व्यक्तिगत स्वायत्तता और स्वतंत्र निर्णय लेने के अधिकार को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।

लेकिन मनुस्मृति में महिलाओं के सम्मान की बात भी है

पूरी तस्वीर का दूसरा पक्ष भी है। मनुस्मृति के अध्याय 3 में महिलाओं के सम्मान को महत्वपूर्ण बताया गया है। श्लोक 3.56 में कहा गया है कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवता प्रसन्न होते हैं और जहां उनका सम्मान नहीं होता, वहां धार्मिक कर्मकांड निष्फल माने जाते हैं।

यानी ग्रंथ में महिलाओं के प्रति सम्मान की बात करने वाले श्लोक भी मौजूद हैं, जबकि दूसरे हिस्सों में उनकी सामाजिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सीमाएं दिखाई देती हैं।

राहुल गांधी के बयान का संदर्भ क्या था?

राहुल गांधी का हालिया बयान मुख्य रूप से महिलाओं की व्यक्तिगत पहचान और स्वतंत्रता को लेकर था। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पिता, पति या किसी पुरुष से जुड़े रिश्ते के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने महिलाओं को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए उनके सपनों, अनुभवों और महत्वाकांक्षाओं को देश की बड़ी संपत्ति बताया।

उनका तर्क था कि समाज में ऐसी सोच को बदलने की जरूरत है जिसमें पुरुषों को अधिक स्वतंत्रता और महिलाओं को नियंत्रित वातावरण मिलता है।

इतिहास और आज के समाज को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी

मनुस्मृति एक प्राचीन धर्मशास्त्रीय ग्रंथ है और उसमें वर्णित सामाजिक नियमों को आधुनिक भारत के संविधान और वर्तमान कानूनों के समान नहीं माना जा सकता। आज भारत का संविधान महिलाओं और पुरुषों को समानता, स्वतंत्रता और कानून के सामने बराबरी का अधिकार देता है।

इसलिए मनुस्मृति के श्लोकों पर चर्चा करते समय दो बातें अलग रखना जरूरी है—ग्रंथ में वास्तव में क्या लिखा है और आधुनिक समाज उन बातों को कैसे देखता है।

राहुल गांधी के बयान के संदर्भ में इतना स्पष्ट है कि मनुस्मृति में ऐसे श्लोक मौजूद हैं जिनमें महिलाओं की स्वतंत्रता पर सीमाएं दिखाई देती हैं। साथ ही, महिलाओं के सम्मान की बात करने वाले श्लोक भी उसी ग्रंथ में मिलते हैं। इसलिए इस विषय को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय मूल पाठ और उसके ऐतिहासिक संदर्भ के आधार पर समझना अधिक सही होगा।

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