कोरोना महामारी के दौरान आपात स्थिति से निपटने और जरूरतमंदों की मदद के उद्देश्य से बनाए गए PM CARES Fund को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। ताजा ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 के अंत में फंड का कुल बैलेंस करीब ₹8,452.95 करोड़ था। वहीं इसी वित्त वर्ष में PM CARES for Children Scheme के तहत केवल करीब ₹87.84 लाख खर्च किए गए। यह आंकड़ा सामने आने के बाद फंड के इस्तेमाल, पारदर्शिता और इतनी बड़ी राशि के लंबे समय तक पड़े रहने को लेकर बहस तेज हो गई है।
कैसे बना था पीएम केयर्स फंड?
PM CARES यानी Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund की स्थापना मार्च 2020 में कोरोना महामारी के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य महामारी जैसी आपात परिस्थितियों में राहत और सहायता उपलब्ध कराना था। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक यह एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में स्थापित किया गया है।
कोरोना के शुरुआती दौर में इस फंड में बड़ी संख्या में लोगों, कंपनियों और संस्थाओं ने योगदान दिया। सरकार ने भी इसके माध्यम से वेंटिलेटर, प्रवासी मजदूरों की सहायता और कोरोना वैक्सीन से जुड़े प्रयासों के लिए धन उपलब्ध कराने की घोषणा की थी।
अब कितना पैसा मौजूद है?
ताजा ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में फंड को कुल ₹8,452.95 करोड़ की प्राप्तियां दर्ज हुईं और 31 मार्च 2025 को इसका अंतिम बैलेंस भी करीब ₹8,452 करोड़ रहा। पिछले वित्त वर्ष में यह राशि ₹7,188.63 करोड़ थी। यानी एक साल के दौरान फंड के आकार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई
रिपोर्ट के अनुसार इस रकम का बड़ा हिस्सा बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा गया था। करीब ₹7,846 करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट में और लगभग ₹605 करोड़ सेविंग्स बैंक अकाउंट्स में बताए गए हैं।
खर्च सिर्फ ₹87.8 लाख, क्यों उठे सवाल?
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि वित्त वर्ष 2024-25 में PM CARES Fund से PM CARES for Children Scheme के तहत केवल ₹87.84 लाख खर्च हुए। पिछले वर्ष इस मद में करीब ₹15.37 करोड़ खर्च किए गए थे।
₹8,452 करोड़ से अधिक के कुल बैलेंस की तुलना में ₹87.8 लाख का खर्च बेहद छोटा हिस्सा है। इसी वजह से आलोचकों का सवाल है कि अगर फंड का उद्देश्य आपात स्थिति में सहायता पहुंचाना है, तो इतनी बड़ी रकम का उपयोग किस तरह और कब किया जाएगा।
हालांकि, केवल एक वित्त वर्ष में हुए खर्च को देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि फंड से पहले कोई बड़ा खर्च नहीं हुआ। कोरोना महामारी के दौरान फंड से हजारों करोड़ रुपये के खर्च और आवंटन की जानकारी सामने आई थी। इसलिए मौजूदा विवाद मुख्य रूप से 2024-25 में कम खर्च और बड़े शेष भंडार को लेकर है।
ब्याज से भी बढ़ी फंड की राशि
ऑडिट रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि फंड को जमा राशि पर ब्याज से करीब ₹470 करोड़ की आय हुई। इसके अलावा लागू करने वाली एजेंसियों से करीब ₹324 करोड़ की राशि वापस आने की बात भी रिपोर्टों में सामने आई है। इससे फंड के कुल वित्तीय आकार पर असर पड़ा।
इसका अर्थ है कि फंड में पैसा केवल नए दान से ही नहीं बढ़ रहा, बल्कि बैंक जमा और निवेश पर मिलने वाले रिटर्न से भी इसकी राशि बढ़ती रही।
पारदर्शिता का मुद्दा क्यों अहम?
PM CARES Fund को लेकर पारदर्शिता का सवाल नया नहीं है। सरकार का रुख रहा है कि यह एक सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट है और इसे सरकारी बजट का हिस्सा नहीं माना जाता। PMO ने पहले RTI के तहत इसे सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना था, जिसके कारण फंड से जुड़ी कई जानकारियों को लेकर विवाद हुआ।
यही वजह है कि समय-समय पर विपक्ष और नागरिक संगठनों की ओर से फंड की आय, खर्च और निर्णय प्रक्रिया से जुड़ी अधिक जानकारी सार्वजनिक करने की मांग उठती रही है।
आगे क्या होगा?
ताजा आंकड़ों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आपातकालीन सहायता के लिए बनाए गए इतने बड़े फंड का उपयोग किस रणनीति के तहत किया जा रहा है। सरकार की ओर से जारी आधिकारिक वित्तीय दस्तावेजों और ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर खर्च और बैलेंस की जानकारी सामने आती है, लेकिन आलोचक अधिक विस्तृत सार्वजनिक जानकारी की मांग करते रहे हैं।
फिलहाल ₹8,452 करोड़ से अधिक के बैलेंस और 2024-25 में केवल ₹87.84 लाख के खर्च ने PM CARES Fund को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है। आने वाले समय में इस राशि के इस्तेमाल और फंड की पारदर्शिता पर चर्चा और बढ़ने की संभावना है।
