तहलका मैगज़ीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को रेप मामले में बड़ा झटका लगा है। बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया और 10 साल के कारावास की सज़ा सुनाई। यह मामला वर्ष 2013 में दर्ज हुआ था, जबकि वर्ष 2021 में सेशन कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था।
गोवा सरकार ने सेशन कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसंदेकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील स्वीकार करते हुए तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी माना। अदालत ने उन्हें धारा 376(2), 354ए और 354बी के तहत अपराधी ठहराते हुए 10 वर्ष की सज़ा सुनाई।
फैसला सुनाए जाने से पहले तरुण तेजपाल ने कहा कि वे इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उनका दावा है कि उनके खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने पहले उन्हें बरी किया था, लेकिन अब उसी मामले में दोबारा सज़ा दी गई है।
यह मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा के एक होटल में आयोजित तहलका मैगज़ीन के कार्यक्रम के दौरान एक महिला सहकर्मी ने आरोप लगाया था कि होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने उनके साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म किया। भारतीय कानून के तहत पीड़िता की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
जांच के दौरान गोवा पुलिस ने करीब 3,000 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया था। अभियोजन पक्ष ने 156 गवाहों की सूची दी थी, जिनमें से लगभग 70 गवाहों की अदालत में जिरह हुई। तेजपाल ने पूरे मामले में खुद को निर्दोष बताया और सभी आरोपों से इनकार किया।
तरुण तेजपाल भारतीय खोजी पत्रकारिता का चर्चित नाम रहे हैं। वर्ष 2000 में शुरू हुई तहलका पत्रिका ने कई बड़े स्टिंग ऑपरेशन किए, जिनमें वर्ष 2001 का ऑपरेशन वेस्ट एंड सबसे चर्चित रहा। हालांकि, अब रेप मामले में हाई कोर्ट के फैसले के बाद उनका यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है।
