मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अहम बातचीत जारी है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि समुद्री मार्ग को दोबारा सामान्य बनाने पर जल्द सहमति बन सकती है। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि यह बातचीत केवल होर्मुज स्ट्रेट तक सीमित है, जबकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अलग से चर्चा होगी और उसका अंतिम उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करना है।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच समझौता जल्द हो सकता है। वहीं, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करना है। उन्होंने दोहराया कि परमाणु मुद्दे पर भविष्य में अलग वार्ता की जाएगी।
इधर, ईरान ने जानकारी दी है कि वह ओमान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के लिए एक अस्थायी और सुरक्षित समुद्री मार्ग तैयार करने पर विचार कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में स्ट्रेट में प्रवेश करने वाले जहाजों की निगरानी ईरान करेगा, जबकि बाहर निकलने वाले जहाजों को ओमान वैकल्पिक मार्ग से मंजूरी देगा। हालांकि, किसी भी क्लियरेंस से पहले ओमान ईरान को सूचित करेगा।
इस बीच क्षेत्र में तनाव से जुड़ी कई अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं। यमन के पास लाल सागर में भारतीय ध्वज वाले एक व्यापारिक जहाज पर हमला हुआ, जिसमें जहाज डूब गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर मौजूद सभी 13 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया।
ईरान के भीतर भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कुछ सांसद विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका आरोप है कि अमेरिका के साथ जारी वार्ता और संभावित समझौते से देश के हित प्रभावित हुए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट पर समझौते की संभावना का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई दिया। निवेशकों का भरोसा बढ़ने से ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि WTI क्रूड की कीमतों में भी करीब 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल समुद्री मार्ग खोल देना पर्याप्त नहीं होगा। स्थायी समाधान के लिए ईरान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह भरोसा भी दिलाना होगा कि भविष्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
