अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पिछले महीने NATO शिखर सम्मेलन के बाद तुर्की से बेहद गोपनीय तरीके से बाहर निकाला गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को ईरान की ओर से राष्ट्रपति के विमान को लेकर गंभीर खतरे की विश्वसनीय जानकारी मिली थी। इसके बाद सीक्रेट सर्विस ने ट्रंप की सुरक्षित निकासी के लिए एक विशेष ऑपरेशन तैयार किया।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई जानकारी के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन का सबसे अहम हिस्सा विमान बदलने का तरीका था। ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर पुराने एयर फोर्स वन में सवार होकर यह संकेत दिया कि वह इसी विमान से तुर्की छोड़ेंगे। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं हुआ।
कैटरिंग वाहन बना गुप्त रास्ता
अंकारा एयरपोर्ट पर कैमरों के सामने ट्रंप एयर फोर्स वन में जाते दिखाई दिए। इसके बाद उन्हें विमान से नीचे लाया गया और एक कैटरिंग वाहन की आड़ में दूसरे स्थान तक पहुंचाया गया। वहां से उन्हें एक कार के जरिए अमेरिकी सेना के तीसरे विमान तक ले जाया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विमान अमेरिकी वायु सेना का C-32A था। यह बोइंग 757 का सैन्य संस्करण है और इसका इस्तेमाल वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों की यात्राओं के लिए किया जाता है। ट्रंप इसी विमान से बिना सार्वजनिक जानकारी के ब्रिटेन रवाना हुए।
पत्रकारों को भी नहीं थी जानकारी
इस पूरे ऑपरेशन में एक खास बात यह रही कि एयर फोर्स वन में मौजूद पत्रकारों को भी यह जानकारी नहीं थी कि राष्ट्रपति उनके साथ विमान में मौजूद नहीं हैं। उन्हें यही लगा कि ट्रंप पुराने एयर फोर्स वन से ही ब्रिटेन जा रहे हैं।
C-32A रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पत्रकारों को लेकर एयर फोर्स वन भी वहां पहुंचा। इस तरह सुरक्षा एजेंसियों ने राष्ट्रपति की वास्तविक यात्रा को आखिरी समय तक गोपनीय रखा।
नए विमान को लेकर भी बदला फैसला
ट्रंप जुलाई की शुरुआत में NATO शिखर सम्मेलन में शामिल होने अंकारा पहुंचे थे। इस यात्रा के लिए उन्होंने कतर की ओर से दिए गए नए बोइंग विमान का इस्तेमाल किया था। यह राष्ट्रपति के रूप में उस विमान की पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा थी।
तुर्की से उन्हें ब्रिटेन जाना था, लेकिन ईरानी खतरे की सूचना के बाद योजना बदल दी गई। कतर से मिले विमान को ब्रिटेन स्थित अमेरिकी सैन्य बेस भेज दिया गया और ट्रंप के लिए पुराने एयर फोर्स वन को सामने रखा गया।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पूरा ऑपरेशन राष्ट्रपति की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी वास्तविक लोकेशन और यात्रा को संभावित खतरे से छिपाने के उद्देश्य से किया गया था।
