बीजिंग में आमने-सामने आए ईरान और चीन के शीर्ष राजनयिक
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 16 सितंबर 2026 को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई दे रहा है।
बैठक के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के अलावा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर चर्चा हुई। चीन ने ईरान के साथ संवाद और सहयोग को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
होर्मुज पर चीन का संदेश क्या था?
बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा खास तौर पर महत्वपूर्ण रहा। दुनिया के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में शामिल इस समुद्री रास्ते में किसी भी तरह का लंबा व्यवधान अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकता है।
चीन ने होर्मुज में सुरक्षित और सामान्य आवाजाही जल्द बहाल करने की अपील की। बीजिंग ने संबंधित पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए तनाव कम करने की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया।
ईरान ने अपनी प्राथमिकताएं कीं स्पष्ट
अराघची ने बैठक में ईरान की स्थिति और पश्चिम एशिया के हालात के बारे में चीनी पक्ष को जानकारी दी। ईरानी पक्ष ने अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा को प्राथमिकता बताया।
साथ ही ईरान की ओर से कूटनीतिक समाधान के लिए रास्ता तलाशने की इच्छा भी जाहिर की गई। ईरानी पक्ष के अनुसार, अमेरिका के साथ पहले बनी सहमति अभी प्रभावी है और होर्मुज से संबंधित व्यवस्था को लेकर ओमान के साथ भी बातचीत हुई है।
चीन ने बातचीत की प्रक्रिया पर दिया जोर
चीन ने ईरान और अमेरिका के बीच संवाद दोबारा शुरू करने की जरूरत पर जोर दिया। बीजिंग का रुख है कि मौजूदा तनाव को कम करने के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
चीन ने क्षेत्रीय देशों के बीच संवाद को भी महत्वपूर्ण बताया। उसका कहना है कि पश्चिम एशिया में लंबे समय की स्थिरता के लिए संबंधित देशों के बीच आपसी बातचीत और सहयोग जरूरी है।
दोनों देशों के रिश्तों पर भी हुई चर्चा
अराघची और वांग यी की बैठक केवल होर्मुज या ईरान-अमेरिका तनाव तक सीमित नहीं रही। दोनों पक्षों ने ईरान और चीन के बीच संबंधों को और मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत की।
ईरान चीन के साथ अपने राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को महत्वपूर्ण मानता है। वहीं चीन ने भी ईरान के साथ संपर्क और सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। ऐसे में यह बैठक दोनों देशों के बीच लगातार जारी उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क का हिस्सा मानी जा रही है।
आगे होर्मुज की स्थिति पर टिकी निगाहें
बीजिंग में हुई इस बैठक के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और ईरान-अमेरिका के बीच आगे होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों पर रहेगी।चीन की ओर से समुद्री मार्ग को सामान्य करने और बातचीत आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है, जबकि ईरान ने अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े हितों को स्पष्ट किया है।
आने वाले दिनों में यह महत्वपूर्ण होगा कि होर्मुज को लेकर बातचीत किस दिशा में बढ़ती है और क्या संबंधित पक्ष तनाव कम करने के लिए किसी व्यावहारिक व्यवस्था पर पहुंच पाते हैं। फिलहाल अराघची की बीजिंग यात्रा ने ईरान-चीन कूटनीतिक संपर्क और होर्मुज संकट को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
