Thursday, October 8, 2026
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‘विमान को गिराने की थी तैयारी’, ओमानी को-पायलट के हमले के बाद इजरायल ने उठाया बड़ा कदम

by Sagar Sharma
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फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान FZ1073 में हुए हमले ने विमान सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी ने कॉकपिट में कप्तान पर हमला कर विमान को नियंत्रित करने की कोशिश की थी। घटना के बाद विमान तेजी से नीचे आया और कुछ समय के लिए उसका संपर्क भी चुनौतीपूर्ण हो गया। यात्रियों और चालक दल की मदद से स्थिति को संभाला गया और विमान की आपात लैंडिंग सऊदी अरब के तबुक में कराई गई।

इजरायल ने लड़ाकू विमान किए थे तैयार

घटना को लेकर सामने आई नई जानकारी के अनुसार, जब विमान से संपर्क नहीं हो पा रहा था और वह इजरायल की ओर बढ़ रहा था, तब इजरायल ने संभावित हाईजैकिंग की स्थिति से निपटने के लिए अपनी सुरक्षा प्रक्रिया सक्रिय कर दी थी। रिपोर्ट के अनुसार लड़ाकू विमानों को तैयार किया गया और इजरायली हवाई क्षेत्र को भी बंद किया गया।

सूत्रों के मुताबिक, इजरायल में ऐसी स्थिति के लिए पहले से एक आपात प्रोटोकॉल मौजूद है। यदि किसी यात्री विमान के अपहृत होने की पुष्टि हो जाती और वह बिना रेडियो संपर्क के किसी संवेदनशील लक्ष्य की ओर बढ़ता, तो उसे मार गिराने का विकल्प भी मौजूद रहता है। हालांकि, अंतिम फैसला बेहद उच्च स्तर पर लिया जाना था।

सैकड़ों लोगों की जान पर मंडराया खतरा

फ्लाईदुबई के इस विमान में 170 से अधिक लोग सवार थे। हमले के दौरान को-पायलट ने कप्तान पर कॉकपिट में हमला किया और विमान को नियंत्रित करने का प्रयास किया। कप्तान ने खुद को बचाते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद यात्रियों और अन्य चालक दल के सदस्यों ने मिलकर हमलावर को काबू किया।

विमान में मौजूद दो अतिरिक्त पायलटों ने बाद में नियंत्रण संभाला और विमान को सऊदी अरब में सुरक्षित उतारने में मदद की। भारतीय कप्तान स्मित मच्छर को इस घटना के दौरान चोटें आईं। यात्रियों की मदद से संभावित बड़ी दुर्घटना को टाला गया।

को-पायलट की मंशा को लेकर बड़ा खुलासा

जांच से जुड़े इजरायली अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, को-पायलट ने पूछताछ में कथित तौर पर बताया कि उसने इस हमले की योजना फ्लाईदुबई में नौकरी मिलने से पहले ही बना ली थी। जांचकर्ताओं का मानना है कि उसका कथित लक्ष्य इजरायल का बेन गुरियन एयरपोर्ट था।

रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि उसने पहले भी इसी तरह की योजना पर विचार किया था, लेकिन उस समय उसे अंजाम नहीं दिया। हालांकि जांच अभी जारी है और अधिकारियों को यह पता लगाना बाकी है कि उसने अकेले यह योजना बनाई थी या इसके पीछे कोई अन्य व्यक्ति अथवा संगठन भी था।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने इजरायल, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात की विमानन सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ओमानी अधिकारियों ने पहले को-पायलट के कथित कट्टरपंथी विचारों को लेकर चिंता जताई थी और उसे उड़ान संबंधी जिम्मेदारियों से हटाकर प्रशासनिक काम दिया था। बाद में वह फ्लाईदुबई में शामिल हो गया।

एक अन्य गंभीर सवाल यह है कि ओमान और इजरायल के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं होने के बावजूद वह इजरायल जाने वाली उड़ान में को-पायलट के रूप में कैसे तैनात हुआ। इस पूरे मामले की अलग-अलग एजेंसियां जांच कर रही हैं।

घटना ने यह भी दिखाया कि विमान में कुछ ही मिनटों के भीतर पैदा होने वाला सुरक्षा संकट कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकता है। फिलहाल जांच का मुख्य फोकस हमले की पूरी योजना, को-पायलट की पृष्ठभूमि, संभावित सहयोगियों और विमानन सुरक्षा में हुई चूकों पर है

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