Thursday, October 8, 2026
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कश्मीर पर पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का झटका! गुटेरेस बोले- सुरक्षा परिषद की क्षमता सीमित, भारत भी हुआ असहज

by Sagar Sharma
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कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उठाने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के एक बयान से बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान यात्रा के दौरान कश्मीर से जुड़े सवाल पर गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मौजूदा भूमिका और उसकी सीमाओं की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया का पूरी तरह प्रतिनिधित्व करने के लिए सुरक्षा परिषद की संरचना पर्याप्त नहीं है और उसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठते रहे हैं

पाकिस्तान को नहीं मिला वैसा समर्थन जिसकी उम्मीद थी

पाकिस्तान लंबे समय से जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर उठाता रहा है। इस दौरान उसका जोर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप पर रहता है। पाकिस्तान की ओर से हाल में भी कहा गया है कि कश्मीर का अंतिम समाधान संयुक्त राष्ट्र के प्रासंगिक प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए

हालांकि, गुटेरेस के ताजा रुख में पाकिस्तान को कोई ऐसी स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं मिली, जिससे संयुक्त राष्ट्र कश्मीर विवाद को सीधे हल करने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे। सुरक्षा परिषद की संरचना और उसकी सीमाओं पर महासचिव की टिप्पणी ने इस पूरे मामले को एक नया कूटनीतिक आयाम दे दिया है।

भारत के लिए भी संदेश आसान नहीं

गुटेरेस का रुख भारत के लिए भी पूरी तरह राहत देने वाला नहीं माना जा सकता। संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक व्यवस्था में जम्मू-कश्मीर से जुड़े पुराने प्रस्ताव और संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह यानी यूएनएमओजीआईपी अभी भी मौजूद हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यह मिशन नियंत्रण रेखा और भारत-पाकिस्तान के बीच संबंधित क्षेत्रों में युद्धविराम से जुड़े घटनाक्रमों पर नजर रखता है।

भारत लंबे समय से यूएनएमओजीआईपी की प्रासंगिकता पर सवाल उठाता रहा है। भारत का तर्क है कि 1972 के शिमला समझौते के बाद दोनों देशों के बीच विवादों को द्विपक्षीय तरीके से सुलझाने की व्यवस्था बनी और ऐसे में तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार्य नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेजों के अनुसार, भारत ने यूएनएमओजीआईपी के जनादेश को समाप्त मानने की स्थिति अपनाई है, जबकि पाकिस्तान इस मिशन को अब भी स्वीकार करता है।

पाकिस्तान दौरे के दौरान कश्मीर पर हुई चर्चा

गुटेरेस इस समय पाकिस्तान की आधिकारिक यात्रा पर हैं। 6 अक्टूबर को उन्होंने पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार से मुलाकात की। दोनों के बीच जम्मू-कश्मीर समेत कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। पाकिस्तानी पक्ष ने कश्मीर पर अपना पुराना रुख दोहराते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के आधार पर समाधान की मांग की।

गुटेरेस ने पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका और संवाद को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की, लेकिन कश्मीर विवाद को हल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की ओर से किसी नई प्रक्रिया की घोषणा नहीं की गई

सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर जोर

कश्मीर के सवाल से आगे बढ़कर गुटेरेस की टिप्पणी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की व्यापक समस्या की ओर भी इशारा करती है। सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना को लेकर लंबे समय से सुधार की मांग होती रही है। भारत भी सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में विस्तार और अधिक प्रतिनिधित्व की वकालत करता रहा है।

कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका इसलिए जटिल बनी हुई है क्योंकि भारत और पाकिस्तान दोनों इस विवाद को लेकर बिल्कुल अलग-अलग दृष्टिकोण रखते हैं। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका चाहता है, जबकि भारत इसे मुख्य रूप से द्विपक्षीय और आंतरिक विषय मानता है।

ऐसे में गुटेरेस का ताजा बयान पाकिस्तान के लिए अपेक्षित कूटनीतिक समर्थन से कम और संयुक्त राष्ट्र की सीमाओं की स्वीकारोक्ति के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, यूएनएमओजीआईपी की मौजूदगी और पुराने प्रस्तावों का अस्तित्व भारत के लिए भी यह संकेत देता है कि कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब नहीं हुआ है।

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