नई दिल्ली: एशियन गेम्स 2026 में भारत के प्रदर्शन की समीक्षा के दौरान खेल मंत्रालय ने खिलाड़ियों की चोटों, एथलेटिक्स और बैडमिंटन में उम्मीद से कम नतीजों तथा अनुभवी खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं। गुरुवार को राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSF) के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने पूछा कि भारत पदक जीतने के लिए मीराबाई चानू जैसे चुनिंदा खिलाड़ियों पर कब तक निर्भर रहेगा।
मंत्रालय की समीक्षा का उद्देश्य खिलाड़ियों की तैयारी, चोटों के प्रबंधन और सरकारी सहायता के प्रभाव का आकलन करना है। इसके साथ ही लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 की तैयारियों को लेकर भी प्राथमिकताएं तय की जा रही हैं।
एशियन गेम्स में भारत ने जीते 85 पदक
जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स में भारत 85 पदकों के साथ पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। भारतीय दल ने 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक जीते।
हालांकि, 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने 106 पदक हासिल किए थे। इस बार कुल पदकों की संख्या में कमी आई, जबकि कुछ प्रमुख खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।
एथलेटिक्स और बैडमिंटन के प्रदर्शन की समीक्षा
मंत्रालय की समीक्षा में एथलेटिक्स और बैडमिंटन पर विशेष ध्यान दिया गया। एथलेटिक्स में भारत ने 24 पदक जीते, लेकिन स्वर्ण पदकों की संख्या पिछले एशियन गेम्स के छह से घटकर एक रह गई।
बैडमिंटन में भारत को पुरुष टीम स्पर्धा में कांस्य पदक मिला। हालांकि, भारतीय खिलाड़ी व्यक्तिगत स्पर्धाओं में पदक हासिल नहीं कर सके। पिछले संस्करण में भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना में इस बार नतीजे कमजोर रहे।
खिलाड़ियों की चोटों पर भी उठे सवाल
समीक्षा बैठक में प्रतियोगिता स्थल पर पहुंचने के बाद खिलाड़ियों के चोटिल होने और कुछ खिलाड़ियों के प्रतियोगिताओं से हटने के मामलों पर भी चर्चा हुई।
नीरज चोपड़ा, ज्योति याराजी, प्रवीण चित्रवेल और अन्य खिलाड़ियों से जुड़े फिटनेस मामलों ने तैयारी और चोट प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े किए। मंत्रालय यह भी देख रहा है कि खिलाड़ियों की फिटनेस की जानकारी समय पर क्यों नहीं सामने आई और चयन से पहले इन परिस्थितियों का आकलन किस तरह किया गया।
मीराबाई चानू ने दिलाया वेटलिफ्टिंग में पदक
भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिलाओं की 49 किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक जीता। उनका पदक भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि देश ने 1998 के बाद पहली बार एशियन गेम्स की वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में पदक हासिल किया।
हालांकि, भारतीय वेटलिफ्टिंग दल के अन्य खिलाड़ी पदक जीतने में सफल नहीं रहे। इसी संदर्भ में मंत्रालय की समीक्षा में यह सवाल सामने आया कि क्या भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के लिए कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहना पड़ रहा है।
TOPS योजना और खिलाड़ियों पर खर्च की समीक्षा
मंत्रालय ने खिलाड़ियों को दी जाने वाली सरकारी सहायता और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के प्रभाव की समीक्षा पर भी जोर दिया। इस योजना के तहत खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय अनुभव, कोचिंग और अन्य सुविधाओं के लिए सहायता दी जाती है।
रिपोर्टों के अनुसार, TOPS के तहत शामिल 34 खिलाड़ियों पर ₹27.16 करोड़ खर्च किए गए थे। मंत्रालय यह समझना चाहता है कि उपलब्ध सहायता का प्रदर्शन पर कितना असर पड़ा और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।
लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 पर नजर
एशियन गेम्स की समीक्षा के बाद खेल मंत्रालय का ध्यान अब लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 की तैयारी पर है। खिलाड़ियों के चयन, चोट प्रबंधन, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी को लेकर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
मंत्रालय की समीक्षा का मुख्य उद्देश्य भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन में निरंतरता लाना और यह सुनिश्चित करना है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में पदक जीतने की जिम्मेदारी कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों तक सीमित न रहे।
