जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और लोकसभा सांसद बिमोल अकोइजाम एक बार फिर चर्चा में हैं। दिल्ली पुलिस के नोटिस का जवाब देने के बाद उनका बयान सुर्खियों में आया है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस मामले में न्याय जरूर मिलेगा। उनके इस रुख के बाद संबंधित मामले की कानूनी प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है।
दिल्ली पुलिस के नोटिस पर क्या बोले बिमोल अकोइजाम?
बिमोल अकोइजाम ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी नोटिस का जवाब दिया है। इस घटनाक्रम के बीच उनका यह कहना कि न्याय जरूर मिलेगा, उनके रुख को सामने लाता है। हालांकि, नोटिस में उठाए गए सवालों, जवाब की विस्तृत सामग्री और पुलिस की अगली कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी के बिना मामले के सभी पहलुओं पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
किसी पुलिस नोटिस का जवाब देना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी या निर्दोष होने का प्रमाण नहीं होता। ऐसे मामलों में संबंधित पक्षों का पक्ष, उपलब्ध दस्तावेज और जांच से जुड़े तथ्य महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।
कौन हैं बिमोल अकोइजाम?
बिमोल अकोइजाम शिक्षाविद और राजनीतिज्ञ हैं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अध्यापन किया है और पूर्वोत्तर भारत से जुड़े सामाजिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक मुद्दों पर अपनी राय रखने के लिए जाने जाते हैं। मणिपुर से उनका जुड़ाव उनकी सार्वजनिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और सार्वजनिक जीवन में सक्रियता के कारण उनके बयानों तथा राजनीतिक गतिविधियों पर ध्यान दिया जाता है। मणिपुर से जुड़े मुद्दों पर उनकी टिप्पणियां भी समय-समय पर चर्चा का विषय बनी हैं।
छात्राओं की शिकायतों के बाद दर्ज हुआ मामला
यह मामला जेएनयू में छात्राओं की ओर से लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मई 2026 में कम से कम 11 छात्राओं ने अकोइजाम के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिकायतों में अनुचित व्यवहार और कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के आरोप शामिल थे। इन आरोपों की जांच के बाद विश्वविद्यालय ने 9 अक्टूबर 2026 को उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया।
अकोइजाम ने आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में मामले के सभी पहलुओं की जांच और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
दिल्ली पुलिस ने क्यों जारी किया नोटिस?
दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर 11 अक्टूबर को मामला दर्ज किया था। इसके बाद वसंत कुंज नॉर्थ थाने की पुलिस ने अकोइजाम को जांच में शामिल होने और अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया। बुधवार को उनके दिल्ली स्थित आवास के बाहर भी नोटिस चस्पा किया गया था।
15 अक्टूबर को अकोइजाम ने ईमेल के माध्यम से नोटिस का जवाब दिया और पुलिस को बताया कि वह 16 अक्टूबर तक जांच में शामिल होंगे। इसके बाद वह मणिपुर की राजधानी इंफाल से दिल्ली के लिए रवाना हुए। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा कि न्याय जरूर मिलेगा
अब आगे क्या होगा?
दिल्ली पुलिस की जांच में अकोइजाम का बयान और मामले से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच एजेंसी शिकायतों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।फिलहाल यह मामला कानूनी जांच के चरण में है। आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता और अंतिम निष्कर्ष संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। इस घटनाक्रम पर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों की नजर बनी हुई है।
