फ्लाईदुबई की उड़ान में सामने आए बेहद गंभीर संकट के दौरान यात्रियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत की। इस दौरान कैप्टन स्मित अपने अनुभव को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि उस मुश्किल घड़ी में वह लगातार हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे और उन्हें महसूस हो रहा था कि शायद हनुमान जी ही सबकी रक्षा कर रहे हैं।
PM मोदी ने पूछा हाल, कैप्टन स्मित ने साझा किया अनुभव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन स्मित मछार से फोन पर बातचीत कर उनकी तबीयत के बारे में जानकारी ली और संकट के समय उनके साहस तथा संयम की सराहना की। बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित ने उस घटना के बारे में बताया, जब विमान में अचानक गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी।
रिपोर्टों के अनुसार, दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में कॉकपिट के भीतर अचानक ऐसी स्थिति बनी, जिससे विमान की सुरक्षा पर बड़ा खतरा पैदा हो गया। कैप्टन स्मित ने हालात को संभालने की कोशिश की। इस दौरान उन्हें गंभीर चोटें भी आईं, लेकिन उन्होंने विमान में मौजूद लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
‘मैं लोगों को मरते हुए नहीं देख सकता था’
प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित ने बताया कि उस समय उनके मन में सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा का विचार था। उन्होंने कहा कि वह अपनी आंखों के सामने इतने लोगों को मरते हुए नहीं देख सकते थे, इसलिए उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार हर संभव प्रयास किया।
कैप्टन स्मित ने यह भी बताया कि वह कठिन समय में हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। संकट की उस घड़ी में भी उन्होंने हनुमान चालीसा पढ़ी। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि हो सकता है कि उस समय हनुमान जी ने ही सभी लोगों की रक्षा की हो।
घायल होने के बावजूद नहीं छोड़ा हौसला
घटना के दौरान कैप्टन स्मित को चोटें आईं और वह घायल हो गए। इसके बावजूद उन्होंने विमान को सुरक्षित रखने और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास जारी रखा। बाद में विमान में मौजूद अन्य पायलटों और क्रू सदस्यों ने भी स्थिति संभालने में मदद की।
विमान को अंततः सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे की ओर मोड़ा गया, जहां इसकी आपात लैंडिंग कराई गई। विमान में सवार यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
PM मोदी ने कहा- देश को आपकी बहादुरी पर गर्व है
प्रधानमंत्री मोदी ने कैप्टन स्मित की बहादुरी की सराहना करते हुए उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। इससे पहले प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से भी उनकी हिम्मत और दूसरों की जान बचाने के प्रयासों की प्रशंसा की थी।
कैप्टन स्मित और प्रधानमंत्री के बीच हुई बातचीत का भावुक क्षण तब सामने आया, जब पायलट ने संकट के दौरान अपनी आस्था और मानसिक स्थिति के बारे में बताया। उनकी बातों से यह भी सामने आया कि बेहद कठिन परिस्थिति में उन्होंने अपने कर्तव्य को सबसे ऊपर रखा।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि विमान में आपात स्थिति के दौरान पायलट का निर्णय, प्रशिक्षण और धैर्य कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कैप्टन स्मित की कहानी में जहां एक ओर विमानन सुरक्षा और पेशेवर जिम्मेदारी का पहलू है, वहीं दूसरी ओर संकट की घड़ी में उनकी व्यक्तिगत आस्था और मानसिक मजबूती भी सामने आती है।
