संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में भारत से जुड़े मुद्दों की चर्चा लगातार सामने आ रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के संबोधन से पहले ही 11 प्रमुख नेताओं ने अपने भाषणों में भारत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या भारतीय नागरिकों का उल्लेख किया। इन संदर्भों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, जलवायु परिवर्तन, हिंद-प्रशांत, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दे शामिल रहे।
सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका पर चर्चा
UNGA के दौरान भारत से जुड़ा एक प्रमुख विषय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार रहा। कई देशों ने वैश्विक संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया।
पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने सुरक्षा परिषद के विस्तार और स्थायी प्रतिनिधित्व के संदर्भ में भारत का उल्लेख किया। वहीं पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य वाले वाइसेग्राड समूह ने भी भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के समर्थन की बात रखी।
जलवायु संकट के संदर्भ में भी भारत का जिक्र
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों पर बात करते हुए नेपाल, भारत और चीन के बीच सहयोग की आवश्यकता का उल्लेख किया।हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने, बाढ़ और मौसम में बदलाव जैसी चुनौतियां कई देशों को प्रभावित करती हैं। ऐसे में भारत का संदर्भ क्षेत्रीय पर्यावरणीय सहयोग से जुड़े विषय में भी सामने आया।
हिंद-प्रशांत से लेकर वैश्विक सहयोग तक
भारत का उल्लेख हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े मुद्दों में भी हुआ। समुद्री सुरक्षा, स्वतंत्र नौवहन और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था जैसे विषयों पर भारत की भूमिका को लेकर कई देशों की अपनी प्राथमिकताएं हैं।
ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों के साथ भारत के रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों का विस्तार हुआ है। यही वजह है कि वैश्विक मंचों पर भारत का उल्लेख कई अलग-अलग संदर्भों में दिखाई देता है।
जयशंकर के संबोधन पर टिकी नजरें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा के सामान्य वाद-विवाद में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य रखेंगे। उनके भाषण से पहले भारत से जुड़े मुद्दों की चर्चा होने के कारण उनके संबोधन पर विशेष ध्यान रहेगा।
भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुधार, वैश्विक दक्षिण की भूमिका, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय संस्थाओं में बदलाव जैसे मुद्दे लगातार उठाए जाते रहे हैं।
कई देशों के साथ हुई अहम मुलाकातें
UNGA के दौरान भारत ने विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों में हिस्सा लिया। इन चर्चाओं में भारत-रूस संबंध, पश्चिम एशिया की स्थिति, खाड़ी क्षेत्र, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषय शामिल रहे।
इन बैठकों के जरिए भारत ने अलग-अलग क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर अपना पक्ष रखने के साथ विभिन्न देशों के साथ संबंधों को लेकर भी बातचीत की।
भारत से जुड़े मुद्दों पर बढ़ा ध्यान
जयशंकर के संबोधन से पहले 11 प्रमुख नेताओं द्वारा भारत का उल्लेख अलग-अलग संदर्भों में किया गया। हालांकि प्रत्येक नेता ने भारत का जिक्र अलग मुद्दे और परिस्थितियों के संदर्भ में किया, लेकिन इससे यह स्पष्ट है कि भारत से जुड़े विषय UNGA की चर्चाओं में मौजूद रहे।
अब नजर जयशंकर के संबोधन पर है, जिसमें भारत वैश्विक चुनौतियों और बहुपक्षीय व्यवस्था को लेकर अपनी प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने रखेगा।
