Thursday, October 8, 2026
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यूपी की सियासत में फिर छाया ‘80-20’ का मुद्दा, सीएम योगी ने राज्यसभा चुनाव को विधानसभा नतीजों से जोड़ा

by Sagar Sharma
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हालिया राज्यसभा चुनाव के राजनीतिक घटनाक्रम को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में भी तस्वीर कुछ ऐसी ही दिखाई दे सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि “लड़ाई फिर 80-20 पर आ गई है” और 80 फीसदी एनडीए के साथ जबकि 20 फीसदी पीडीए के साथ है।

राज्यसभा चुनाव को लेकर योगी का दावा

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों को लेकर सामने आए राजनीतिक समीकरणों के बीच मुख्यमंत्री योगी का यह बयान आया है। बीजेपी ने आठ उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से दो उम्मीदवारों को प्रत्याशी बनाया गया है। मौजूदा समीकरणों के चलते सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की स्थिति बनी है।

मुख्यमंत्री ने इसी घटनाक्रम को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक संकेत के तौर पर पेश किया। उनका कहना है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान जिस तरह का राजनीतिक गणित सामने आया, उससे विधानसभा चुनाव की दिशा का भी अंदाजा लगाया जा सकता है।

अखिलेश यादव के फैसले पर भी सवाल

राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के तीसरे उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारने के फैसले ने भी राजनीतिक चर्चा को बढ़ाया। अगर तीसरा प्रत्याशी मैदान में आता तो मुकाबले की स्थिति बन सकती थी। लेकिन सपा ने दो उम्मीदवारों के साथ ही चुनावी मैदान में रहने का फैसला किया।योगी आदित्यनाथ ने इसी घटनाक्रम को विपक्ष के लिए राजनीतिक संदेश के तौर पर इस्तेमाल किया। उनके बयान के बाद यूपी की राजनीति में राज्यसभा चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव के बीच तुलना तेज हो गई है।

क्या है ‘80-20’ का राजनीतिक मतलब?

मुख्यमंत्री योगी ने अपने बयान में 80-20 के आंकड़े को एनडीए और पीडीए से जोड़कर पेश किया। उन्होंने कहा कि 80 फीसदी एनडीए के साथ है, जबकि 20 फीसदी पीडीए के साथ है।पीडीए का इस्तेमाल समाजवादी पार्टी की राजनीति में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के संदर्भ में किया जाता है। वहीं एनडीए बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन है।

‘80-20’ का यह राजनीतिक संदर्भ उत्तर प्रदेश में पहले भी चर्चा में रहा है। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री के ताजा बयान ने इस मुद्दे को फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

क्या राज्यसभा चुनाव से विधानसभा का नतीजा तय होगा?

राज्यसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव का गणित पूरी तरह अलग होता है। राज्यसभा चुनाव में विधायक अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं, जबकि विधानसभा चुनाव में सीधे जनता मतदान करती है। इसलिए राज्यसभा में बने समीकरण को विधानसभा चुनाव का निश्चित परिणाम मानना सही नहीं होगा।

हालांकि, राजनीतिक दल अक्सर राज्यसभा और अन्य चुनावों के नतीजों को आगामी चुनावों के लिए जनसमर्थन के संकेत के तौर पर पेश करते हैं। योगी आदित्यनाथ का बयान भी इसी राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।

2027 से पहले बढ़ेगा सियासी मुकाबला

उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच बड़े राजनीतिक मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है। दोनों पक्ष लगातार अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं।मुख्यमंत्री योगी सरकार के विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक उपलब्धियों को मुद्दा बना रहे हैं, जबकि विपक्ष सरकार की नीतियों और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहा है।

राज्यसभा चुनाव के बाद अब ‘80-20’ का मुद्दा एक बार फिर यूपी की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि इसका वास्तविक चुनावी असर क्या होगा, यह 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।

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