भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय से चली आ रही तल्खी के बीच अब बीजिंग के रुख में नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं। चीन के सरकारी मीडिया में भारत के साथ सीमा विवाद के बजाय व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। यह बदलाव ऐसे समय में देखने को मिल रहा है, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे हैं।
रिश्तों में तल्खी के बीच आर्थिक सहयोग की नई चर्चा
चीन के हालिया बयानों और मीडिया कवरेज में भारत के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक भाषा का इस्तेमाल बढ़ा है। खास तौर पर दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को आगे बढ़ाने और कारोबारी सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत-चीन संबंधों में सीमा विवाद और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे सबसे ज्यादा चर्चा में रहे हैं। ऐसे में आर्थिक सहयोग पर चीन का बढ़ता जोर दोनों देशों के रिश्तों में संभावित बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
दिल्ली पहुंच चुके हैं शी जिनपिंग
शी जिनपिंग का भारत दौरा दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके नई दिल्ली पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ व्यापार, निवेश, सीमा और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
व्यापार बढ़ाने पर हो सकता है फोकस
भारत और चीन के बीच व्यापार काफी बड़ा है, लेकिन व्यापार असंतुलन और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दे लंबे समय से चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में आर्थिक संवाद को आगे बढ़ाना दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।यदि दोनों पक्ष व्यापारिक बाधाओं को कम करने और निवेश के नए रास्ते तलाशने पर सहमत होते हैं, तो इससे द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों को नई गति मिल सकती है।
अमेरिका के साथ बदलते समीकरणों का भी असर
दुनिया में तेजी से बदल रहे आर्थिक और रणनीतिक समीकरणों के बीच भारत और चीन दोनों के लिए अपनी आर्थिक साझेदारियों को मजबूत करना महत्वपूर्ण हो गया है।अमेरिका की व्यापार नीतियों और वैश्विक स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत-चीन के बीच आर्थिक सहयोग की कोशिशों को एक नए रणनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
सीमा विवाद अब भी बड़ी चुनौती
हालांकि आर्थिक सहयोग को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, लेकिन भारत और चीन के बीच सभी मतभेद खत्म नहीं हुए हैं। सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे अभी भी दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित करते हैं।इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को दोनों देशों के बीच पूरी तरह से रिश्ते बदलने के बजाय तनाव कम करने और संवाद बढ़ाने की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जा सकता है।
मोदी-जिनपिंग मुलाकात से क्या निकलेगा रास्ता?
अब सबसे ज्यादा नजरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की संभावित बातचीत पर हैं। यदि दोनों नेता आर्थिक सहयोग बढ़ाने, व्यापारिक अड़चनों को कम करने और सीमा से जुड़े मुद्दों पर संवाद जारी रखने को लेकर आगे बढ़ते हैं, तो भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत की संभावना बन सकती है।आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि चीन के बदले तेवर और दिल्ली में होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत दोनों देशों के रिश्तों को किस दिशा में ले जाती है।
