भारत और भूटान के बीच रेल कनेक्टिविटी को लेकर लंबे समय से चल रही योजना अब जमीन पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित रेल लिंक को क्षेत्रीय संपर्क और व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह कनेक्टिविटी भारत के रणनीतिक रूप से अहम सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ के आसपास के क्षेत्र से जुड़ती है। ऐसे में परियोजना का असर केवल परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके रणनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
तीन साल में बदल सकती है तस्वीर
प्रस्तावित रेल परियोजना के पूरा होने के बाद भूटान को पहली बार भारतीय रेलवे नेटवर्क से सीधा संपर्क मिलने की उम्मीद है। इससे दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही के साथ-साथ माल ढुलाई को भी बढ़ावा मिल सकता है। परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया गया तो आने वाले करीब तीन वर्षों में दोनों देशों के बीच रेल संपर्क का सपना हकीकत में बदल सकता है।
असम के रास्ते भूटान से जुड़ेगा रेल नेटवर्क
भारत-भूटान रेल कनेक्टिविटी के तहत असम के कोकराझार से भूटान के गेलेफू तक रेल लिंक विकसित करने की योजना है। यह करीब 57 किलोमीटर लंबा रेल मार्ग होगा। इसका उद्देश्य भूटान के दक्षिणी हिस्से को भारत के रेलवे नेटवर्क से जोड़ना है। गेलेफू को भूटान में तेजी से विकसित हो रहे आर्थिक केंद्र के रूप में भी देखा जा रहा है।
कारोबार और पर्यटन को मिलेगा फायदा
रेल कनेक्टिविटी शुरू होने के बाद भारत और भूटान के बीच व्यापार को गति मिलने की संभावना है। सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होने से माल की आवाजाही आसान और अपेक्षाकृत तेज हो सकती है। इसके अलावा भूटान जाने वाले भारतीय पर्यटकों और भारत आने वाले भूटानी नागरिकों के लिए भी यात्रा के नए विकल्प खुलेंगे।
रेल संपर्क से भूटान के उत्पादों को भारतीय बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। वहीं भारतीय कंपनियों के लिए भी भूटान में निवेश और कारोबार के नए अवसर तैयार हो सकते हैं।
चिकन नेक के करीब होने से रणनीतिक महत्व
भारत का सिलीगुड़ी कॉरिडोर देश के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण भू-भाग है। इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इस क्षेत्र में किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का रणनीतिक महत्व बढ़ जाता है।
भारत-भूटान के बीच बेहतर संपर्क से इस पूरे इलाके में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। चीन की भूटान और हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक सक्रियता के बीच भारत की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को मजबूत करना नई दिल्ली की क्षेत्रीय रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
भारत-भूटान रिश्तों में नया अध्याय
भारत और भूटान के संबंध पहले से ही मजबूत हैं। ऊर्जा, जलविद्युत, व्यापार और विकास परियोजनाओं के बाद अब परिवहन कनेक्टिविटी दोनों देशों के रिश्तों का एक अहम स्तंभ बन सकती है। कोकराझार-गेलेफू रेल लिंक के पूरा होने से न सिर्फ यात्रा और व्यापार आसान होगा, बल्कि पूर्वोत्तर भारत और भूटान के बीच आर्थिक संपर्क भी मजबूत होगा।
हालांकि परियोजना को पूरा करने के लिए निर्माण, भूमि और तकनीकी स्तर पर कई चुनौतियों से गुजरना होगा। इसके बावजूद यदि तय समय के अनुसार काम आगे बढ़ता है तो आने वाले वर्षों में भारत-भूटान संबंधों में कनेक्टिविटी एक नई भूमिका निभा सकती है।
