जुलाई-अगस्त 2026 में देश के कई राज्यों से स्कूली बच्चों के प्रदर्शन की खबरें सामने आईं। इन प्रदर्शनों में बच्चों ने किसी बड़ी या नई सुविधा की मांग नहीं की, बल्कि शिक्षक, बिजली, पंखे, साफ पानी, शौचालय, भोजन, सुरक्षित भवन और स्कूल तक पहुंच जैसी जरूरी सुविधाओं की मांग उठाई। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में छात्रों की शिकायतें सामने आईं। खास बात यह है कि इनमें से कई सुविधाएं शिक्षा के अधिकार कानून के तहत बच्चों के अधिकार का हिस्सा हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सरकारी आंकड़ों में सुधार के बावजूद जमीन पर बच्चों को ये सुविधाएं पूरी तरह क्यों नहीं मिल पा रही हैं।
कई राज्यों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर आवाज
जुलाई और अगस्त के दौरान कम से कम 10 राज्यों और 25 जिलों से छात्रों के विरोध-प्रदर्शन की जानकारी सामने आई। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में छात्रों ने बिजली, पंखे, खराब डेस्क, गंदे पानी और शौचालय की समस्या उठाई। बिहार के गया में करीब 50 छात्रों ने खराब मिड-डे मील, पानी, बिजली, यूनिफॉर्म और पढ़ाई की गुणवत्ता को लेकर करीब 4 किलोमीटर पैदल मार्च किया।
महाराष्ट्र के पालघर, बीड और धाराशिव में भी छात्रों ने स्कूल की सुविधाओं और शिक्षकों की कमी को लेकर प्रदर्शन किया। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और पंजाब से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आईं।
सरकारी आंकड़ों में सुधार, लेकिन राज्यों में अंतर
शिक्षा मंत्रालय की UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। देश में करीब 95 फीसदी स्कूलों में बिजली, 99.5 फीसदी में पीने का पानी और 98.5 फीसदी में लड़कियों के लिए शौचालय की सुविधा है। हालांकि राज्यों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।
उत्तर प्रदेश में बिजली की सुविधा 88.8 फीसदी स्कूलों में है, जबकि तमिलनाडु में यह आंकड़ा 100 फीसदी है। स्वच्छ और काम करने वाले शौचालयों की स्थिति भी राजस्थान और मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय औसत से कम है। इससे साफ है कि राष्ट्रीय स्तर के आंकड़े पूरे देश की एक जैसी तस्वीर नहीं बताते।
शिक्षक की कमी भी बड़ी चुनौती
छात्रों की शिकायतों में शिक्षकों की कमी लगातार सामने आई। महाराष्ट्र के बीड और धाराशिव में छात्रों ने गणित, विज्ञान और अन्य विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की। राजस्थान के जालोर में भी शिक्षक की कमी को लेकर विरोध हुआ।
UDISE+ 2025-26 के मुताबिक देश में अभी भी 1,00,843 ऐसे स्कूल हैं जहां सिर्फ एक शिक्षक है। हालांकि पिछले साल की तुलना में यह संख्या कम हुई है, लेकिन इतने बड़े स्तर पर सिंगल-टीचर स्कूल होना शिक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है।
भोजन, सुरक्षा और स्कूल तक पहुंच भी मुद्दा
कई आवासीय स्कूलों में छात्रों ने भोजन की गुणवत्ता, पानी, बिजली, सफाई और हॉस्टल की सुविधाओं को लेकर भी आवाज उठाई। राजस्थान के अलवर में स्कूल की छत का हिस्सा गिरने के बाद छात्रों ने सुरक्षा को लेकर प्रदर्शन किया। वहीं कुछ जगहों पर स्कूल दूर शिफ्ट किए जाने और खराब सड़कों के कारण बच्चों को होने वाली परेशानी भी सामने आई।
शिक्षा का अधिकार यानी RTE Act, 2009 में सुरक्षित स्कूल भवन, अलग शौचालय, साफ पानी और जरूरी शिक्षण सुविधाओं जैसे कई मानक तय किए गए हैं। इसलिए छात्रों की मांगें सिर्फ सुविधाओं की मांग नहीं, बल्कि उनके अधिकारों से भी जुड़ी हैं।
सुधार के बावजूद जमीन पर सवाल
UDISE+ के अनुसार बिजली, कंप्यूटर, इंटरनेट और शौचालय जैसी सुविधाओं में सुधार हुआ है। लेकिन रैंप और हैंडरेल जैसी सुविधाएं अभी भी सीमित स्कूलों तक पहुंची हैं। खेल मैदान की उपलब्धता में भी कमी दर्ज की गई है।
इस पूरी स्थिति से यही पता चलता है कि स्कूलों की औसत तस्वीर बेहतर हो रही है, लेकिन हर बच्चे तक समान सुविधा नहीं पहुंच रही। चुनौती केवल योजनाएं बनाने की नहीं, बल्कि उनका सही तरीके से जमीन पर लागू होना भी है। बच्चों के प्रदर्शन इसी अंतर की ओर ध्यान खींच रहे हैं।
