भारत में हर साल लाखों युवा ग्रेजुएशन की डिग्री लेकर नौकरी की तलाश में निकलते हैं, लेकिन सिर्फ डिग्री हासिल कर लेना रोजगार की गारंटी नहीं है। नीति आयोग की Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047 रिपोर्ट ने शिक्षा और नौकरी के बीच मौजूद बड़े अंतर की ओर ध्यान दिलाया है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में केवल 8.25 फीसदी ग्रेजुएट ही अपनी योग्यता के मुताबिक रोजगार हासिल कर पाते हैं। छात्रों में प्रैक्टिकल अनुभव, इंडस्ट्री एक्सपोजर और जरूरी स्किल की कमी इस समस्या की बड़ी वजह है। इससे युवाओं को डिग्री के बाद भी अतिरिक्त ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट की जरूरत पड़ती है।
डिग्री और नौकरी के बीच बढ़ रहा अंतर
नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि देश में उच्च शिक्षा लेने वाले छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन रोजगार बाजार की मांग और कॉलेजों में पढ़ाई जाने वाली चीजों के बीच अभी भी बड़ा अंतर है। कई संस्थानों का पाठ्यक्रम तेजी से बदलती इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार अपडेट नहीं हो पाता।
इसका सीधा असर छात्रों के करियर पर पड़ता है। डिग्री पूरी करने के बाद उन्हें नौकरी के लिए अलग से तकनीकी या व्यावहारिक प्रशिक्षण लेना पड़ता है। देश में करीब 3.4 करोड़ छात्र अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में पढ़ रहे हैं। इनमें लगभग 1.3 करोड़ छात्र बीए कर रहे हैं, जबकि बीए, बीएससी और बीकॉम में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 2 करोड़ से ज्यादा है।
80 फीसदी छात्रों को प्रैक्टिकल अनुभव की कमी
रिपोर्ट में छात्रों की ओर से बताई गई रोजगार संबंधी परेशानियों को भी सामने रखा गया है। करीब 80 फीसदी छात्रों ने कहा कि प्रैक्टिकल अनुभव और इंडस्ट्री से जुड़ने का मौका नहीं मिलना नौकरी पाने में बड़ी बाधा है। वहीं 34 फीसदी छात्रों ने स्किल गैप और 18 फीसदी ने इंटरव्यू की तैयारी की कमी को समस्या बताया।
बीए, बीएससी और बीकॉम जैसी डिग्रियां आज भी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके साथ डिजिटल स्किल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर और ऑफिस वर्क से जुड़ी क्षमताएं विकसित करना जरूरी हो गया है। कंपनियां खासकर एंट्री लेवल नौकरियों में सिर्फ शैक्षणिक योग्यता के बजाय उम्मीदवार की व्यावहारिक क्षमता को भी महत्व देती हैं।
सरकारी नौकरी की ओर युवाओं का बढ़ता रुझान
रिपोर्ट में सरकारी नौकरियों के प्रति युवाओं के बढ़ते आकर्षण का भी उल्लेख किया गया है। नवंबर 2024 से जुलाई 2025 के बीच करीब 55 हजार सरकारी पदों के लिए लगभग 1.86 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीमित सरकारी पदों के मुकाबले नौकरी की तलाश करने वाले युवाओं की संख्या कितनी ज्यादा है।
ऐसे में रोजगार के बेहतर अवसर पैदा करने के लिए शिक्षा व्यवस्था में बदलाव, इंडस्ट्री आधारित ट्रेनिंग और छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही प्रैक्टिकल अनुभव देना जरूरी है। इससे डिग्री और नौकरी के बीच मौजूद स्किल गैप को कम किया जा सकता है।
