Saturday, September 12, 2026
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वंदे मातरम् विवाद पर बंकिम चंद्र के वंशज का सोनिया गांधी को पत्र

वंदे मातरम् विवाद पर बंकिम चंद्र के वंशज का सोनिया गांधी को पत्र, शुभेंदु ने भी कांग्रेस को घेरा

by Sagar Sharma
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वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब पश्चिम बंगाल तक पहुंच गया है. दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर राष्ट्रगीत के पूरे संस्करण को लेकर हुई घटना पर बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कांग्रेस से माफी मांगने को कहा है. वहीं, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने भी इस मामले पर सोनिया गांधी को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है. उन्होंने इसे देशभक्ति और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला बताया है.

बंगाल में भी गरमाया वंदे मातरम् विवाद

दिल्ली से शुरू हुआ वंदे मातरम् का विवाद अब पश्चिम बंगाल पहुंच गया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में हुए स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस से माफी की मांग की. उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् का भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में बेहद महत्वपूर्ण स्थान रहा है और इसका अपमान देशभक्ति की भावना का अपमान है.

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वंदे मातरम् करीब 150 साल से देश की राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा हुआ है. उन्होंने दावा किया कि क्रांतिकारियों के लिए यह गीत प्रेरणा का बड़ा स्रोत था. उन्होंने कहा कि बंगाल की धरती से वह इस घटना की कड़ी निंदा करते हैं.

सोनिया गांधी से मांगी गई प्रतिक्रिया

शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल कांग्रेस पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस के नेताओं में इस मुद्दे पर विरोध करने की ताकत नहीं है. हालांकि, उन्होंने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देने की उम्मीद जताई.

अधिकारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की ओर से राष्ट्रवाद और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के योगदान का सम्मान नहीं किया गया. उन्होंने इस मामले को तुष्टिकरण की राजनीति से भी जोड़ते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए.

बंकिम चंद्र के वंशज ने लिखा पत्र

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई है. उन्होंने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कहा कि कांग्रेस मुख्यालय के कार्यक्रम में वंदे मातरम् के पूरे संस्करण को गाने को लेकर कथित तौर पर असहज स्थिति पैदा हुई. उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए गहरा दुख और गुस्सा जाहिर किया.

सुमित्रो चटर्जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम् की भूमिका का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम् गाया था. इसके बाद 1905 के बनारस अधिवेशन में सरला देवी चौधुरानी ने भी इसका गायन किया. उनके मुताबिक, यह गीत आजादी की लड़ाई में लोगों के लिए प्रेरणा और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक रहा है.

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