घरेलू शेयर बाजार के लिए पिछला सप्ताह कमजोर रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट देखने को मिली। अब निवेशकों की नजर 17 अगस्त से शुरू हो रहे नए कारोबारी सप्ताह पर है। बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक घटनाक्रम, पश्चिम एशिया का संकट, कच्चे तेल की कीमतें और घरेलू आर्थिक आंकड़े अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की भारतीय बाजार में वापसी भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
FPI ने भारतीय बाजार में बढ़ाया निवेश
विदेशी निवेशकों ने अगस्त के शुरुआती दो हफ्तों में भारतीय पूंजी बाजार में 15,691 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है। केंद्रीय डिपॉजिटरी सेवा के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में अब तक FPI ने भारतीय इक्विटी में 16,621 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है। हालांकि डेट और हाइब्रिड सेगमेंट में विदेशी निवेशक शुद्ध बिकवाल रहे। दूसरी ओर, म्यूचुअल फंड में निवेश का रुख सकारात्मक बना हुआ है।
FPI की यह वापसी घरेलू शेयर बाजार के लिए अहम हो सकती है। अगर विदेशी निवेश का प्रवाह आगे भी जारी रहता है तो इससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ने के साथ प्रमुख सूचकांकों को सपोर्ट मिल सकता है।
पिछले सप्ताह सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट
पिछले कारोबारी सप्ताह में बीएसई सेंसेक्स 489.92 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,009.25 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स के पांच कारोबारी सत्रों में सोमवार और गुरुवार को तेजी रही, जबकि बाकी तीन दिन बाजार दबाव में रहा।
एनएसई का निफ्टी-50 भी 204.65 अंक यानी 0.83 प्रतिशत फिसलकर शुक्रवार को 24,366 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी मिडकैप-50 में 0.48 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि स्मॉलकैप-100 में 0.65 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
इन शेयरों पर रहा दबाव
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 19 के शेयरों में साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई। टीसीएस का शेयर सबसे अधिक 3.86 प्रतिशत टूटा। आईटीसी में 2.77 प्रतिशत, अल्ट्राटेक सीमेंट में 2.70 प्रतिशत, एसबीआई में 2.56 प्रतिशत और टाटा स्टील में 2.45 प्रतिशत की गिरावट रही।
इसके अलावा पावरग्रिड, महिंद्रा एंड महिंद्रा, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एक्सिस बैंक के शेयर भी कमजोर रहे।
इन शेयरों में दिखी तेजी
दूसरी ओर, टाइटन के शेयर में 2.75 प्रतिशत की साप्ताहिक तेजी रही। बीईएल 2.06 प्रतिशत, भारती एयरटेल 1.68 प्रतिशत और बजाज फिनसर्व 1.40 प्रतिशत चढ़े। एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इटरनल, बजाज फाइनेंस, अडानी पोर्ट्स, एलएंडटी, हिंदुस्तान यूनिलीवर और कोटक महिंद्रा बैंक में भी बढ़त देखने को मिली।
कच्चे तेल और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर
आने वाले सप्ताह में पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतें बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतकों में शामिल रहेंगी। तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव का असर भारत की महंगाई, आयात बिल और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।
इसके साथ ही घरेलू स्तर पर जुलाई के नौ प्रमुख उद्योगों से जुड़े आंकड़े जारी होने हैं। इन आंकड़ों से अर्थव्यवस्था की स्थिति का संकेत मिलेगा और बाजार की धारणा प्रभावित हो सकती है।
कुल मिलाकर, FPI की वापसी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन वैश्विक जोखिम और कच्चे तेल की कीमतों के कारण उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को बाजार में सावधानी के साथ कदम उठाने की जरूरत होगी।
डिस्क्लेमर: यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।
