छत्तीसगढ़ में अपनी पहली फील्ड पोस्टिंग के दौरान 2022 बैच के ट्रेनी IPS अधिकारी राहुल बंसल एक कथित रिश्वत मामले को लेकर विवादों में घिर गए हैं। आरोप है कि एक साइबर फ्रॉड मामले को दबाने या कार्रवाई से बचाने के लिए उनसे जुड़े पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर ₹1 करोड़ की रिश्वत की मांग की और रकम स्वीकार की। मामले में बंसल के अलावा असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार राठौर और कांस्टेबल अंशुल शर्मा के नाम भी शिकायत में सामने आए हैं।
कौन हैं IPS राहुल बंसल?
शिकायत के अनुसार, राहुल बंसल IPS में शामिल होने से पहले आयकर विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत थे। IPS ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में सिटी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (CSP) के तौर पर पहली फील्ड पोस्टिंग मिली थी। इसी दौरान उन पर रिश्वत से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
हालांकि, आरोपों की जांच और उनमें शामिल अधिकारियों की भूमिका को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
WhatsApp चैट और कॉल रिकॉर्डिंग बनी अहम कड़ी
मामले में शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर कई डिजिटल सबूत जांच एजेंसियों के सामने पेश किए हैं। इनमें WhatsApp पर हुई बातचीत और कॉल रिकॉर्डिंग शामिल हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि ₹1 करोड़ की कथित रिश्वत एक साथ नहीं दी गई, बल्कि मई 2026 में दो अलग-अलग किस्तों में ₹50-50 लाख के जरिए भुगतान किया गया। शिकायत में इन लेन-देन के लिए हवाला चैनल के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया है।
दिल्ली की स्पेशल CBI कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
मामला अब दिल्ली की स्पेशल CBI कोर्ट तक पहुंच चुका है। अदालत ने शिकायत और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ के DGP और CBI निदेशक से Action Taken Report (ATR) मांगी है। इस रिपोर्ट में यह बताना होगा कि शिकायत मिलने के बाद आरोपी अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
एक और रिश्वत मामले में अधिकारी गिरफ्तार
इसी बीच महाराष्ट्र के नवी मुंबई में भी रिश्वत से जुड़ा एक अलग मामला सामने आया है। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, एंटी करप्शन ब्यूरो ने एक वरिष्ठ सेल्स टैक्स अधिकारी को कथित तौर पर ₹8 लाख की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान दीपक रामचंद्र क्षीरसागर के रूप में हुई है, जो कथित घटना के समय रायगढ़ डिवीजन, CBD बेलापुर में असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ सेल्स टैक्स के पद पर तैनात थे।
इन दोनों मामलों ने एक बार फिर सरकारी अधिकारियों के खिलाफ सामने आने वाले भ्रष्टाचार के आरोपों और डिजिटल सबूतों की भूमिका को चर्चा में ला दिया है।
