सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि अफगानिस्तान में भारतीय तिरंगा फहराया गया और वहां लोगों ने भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाया। वीडियो के साथ सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा गया है—“अफगानिस्तान में भारत का राष्ट्रगान गाया गया… अखंड भारत अब दूर नहीं।” इस दावे के बाद वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
वायरल वीडियो में बड़ी संख्या में लोग एक खुले स्थान पर दिखाई दे रहे हैं। भीड़ के बीच भारतीय तिरंगा नजर आता है और पृष्ठभूमि में एक बड़ी मस्जिद जैसी इमारत दिखाई देती है। वीडियो को देखकर कई सोशल मीडिया यूजर्स इसे अफगानिस्तान का दृश्य मान रहे हैं। हालांकि, पड़ताल में सामने आया है कि वीडियो का अफगानिस्तान से कोई संबंध नहीं है।
फैक्ट-चेक करने वाली संस्थाओं के मुताबिक, यह वीडियो उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद स्थित दारुल उलूम देवबंद का है। यहां गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराया गया था और राष्ट्रगान गाया गया था। वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली इमारत की पहचान देवबंद की प्रसिद्ध मस्जिद-ए-रशीद के रूप में की गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि वीडियो को इससे पहले 26 जनवरी के आसपास सोशल मीडिया पर देवबंद में गणतंत्र दिवस समारोह के वीडियो के रूप में साझा किया गया था। बाद में इसी वीडियो को अलग संदर्भ के साथ दोबारा शेयर किया गया और इसे अफगानिस्तान का बताकर दावा किया गया कि वहां भारतीय राष्ट्रगान गाया गया।
दरअसल, वीडियो में भारतीय तिरंगे की मौजूदगी और बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने के कारण इसे देखकर कई यूजर्स भ्रमित हुए। इसके बाद “अखंड भारत” से जुड़े दावे भी पोस्ट के साथ तेजी से फैलने लगे। लेकिन उपलब्ध तथ्यों और वीडियो की लोकेशन की जांच से स्पष्ट होता है कि इसे अफगानिस्तान का बताना सही नहीं है।
फैक्ट-चेक में दारुल उलूम देवबंद से जुड़े मौलाना मूसा क़ासमी से भी संपर्क किया गया। उन्होंने पुष्टि की कि वायरल वीडियो अफगानिस्तान का नहीं, बल्कि देवबंद का है। वीडियो में दिखाई देने वाली मस्जिद भी देवबंद की प्रसिद्ध मस्जिद-ए-रशीद है।
इस तरह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा “अफगानिस्तान में भारत का राष्ट्रगान” वाला दावा भ्रामक साबित होता है। वीडियो में भारतीय राष्ट्रगान और तिरंगा जरूर दिखाई देते हैं, लेकिन इसका स्थान अफगानिस्तान नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश का देवबंद है।
ऐसे में किसी भी वायरल वीडियो को उसके कैप्शन या दावे के आधार पर सही मानने के बजाय उसकी मूल जानकारी, स्थान और तारीख की पुष्टि करना जरूरी है। पुराने वीडियो को नए घटनाक्रम या किसी दूसरे देश से जोड़कर साझा करने से सोशल मीडिया पर गलत सूचना तेजी से फैल सकती है।
