सावन शिवरात्रि का पावन पर्व आज मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। भगवान शिव की आराधना के लिए सावन शिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में भक्त व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र समेत विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
चतुर्दशी तिथि कब से कब तक?
पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त 2026 को सुबह 4:54 बजे शुरू हुई और 12 अगस्त 2026 को रात 1:52 बजे समाप्त होगी। वहीं, व्रत का पारण 12 अगस्त की सुबह 5:48 बजे किया जा सकेगा।
निशिता काल में पूजा का शुभ समय
सावन शिवरात्रि पर निशिता काल में भगवान शिव की पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है। इस दौरान पूजा का समय 12 अगस्त की रात 12:05 बजे से 12:48 बजे तक रहेगा। यानी भक्तों को पूजा के लिए कुल 43 मिनट का समय मिलेगा।
चार पहर में होगी शिव पूजा
शिवरात्रि की रात चार पहर में पूजा करने की परंपरा है। पहले पहर की पूजा शाम 7:04 बजे से रात 9:45 बजे तक होगी। दूसरे पहर का समय रात 9:45 बजे से 12:26 बजे तक रहेगा। तीसरे पहर की पूजा 12:26 बजे से सुबह 3:07 बजे तक और चौथे पहर की पूजा सुबह 3:07 बजे से 5:48 बजे तक की जाएगी।
इस तरह करें भगवान शिव का जलाभिषेक
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव के मंदिर जाएं। शिवलिंग पर सबसे पहले जल अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धानुसार कच्चा दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ा सकते हैं। जलाभिषेक के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए भगवान शिव का ध्यान करें।
