दिल्ली में 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान घायल हुए कुछ सीजेपी समर्थकों की चोटों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। बीबीसी से बातचीत करने वाले स्वतंत्र बैलिस्टिक और फोरेंसिक विशेषज्ञों ने दावा किया है कि कुछ प्रदर्शनकारियों के शरीर पर मिले घाव पैलेट गन या बर्डशॉट से लगी चोटों जैसे दिखाई देते हैं। हालांकि, इस मामले में दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों से साफ इनकार किया है।रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा सुधारों और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों लोग संसद की ओर मार्च कर रहे थे। इस दौरान प्रदर्शन हिंसक हो गया और पुलिस तथा अर्द्धसैनिक बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। पुलिस के मुताबिक इस झड़प में प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बलों के जवान दोनों घायल हुए, जबकि सीजेपी ने दावा किया कि घायलों की संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक थी।बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि उसने कम से कम चार ऐसे मामलों की पुष्टि की है, जिनमें अस्पतालों में भर्ती घायलों की चोटों का परीक्षण किया गया। विशेषज्ञों ने तस्वीरों और वीडियो का अध्ययन करने के बाद कहा कि शरीर पर बने कई छोटे गोल निशान बर्डशॉट के कारण होने वाली चोटों से मेल खाते हैं। ब्रिटेन के बैलिस्टिक विशेषज्ञ फिलिप बॉयस और आर्मामेंट रिसर्च सर्विसेज़ के निदेशक एनआर जेनज़ेन-जोन्स ने भी इन चोटों को पैलेट गन से जुड़ी चोटों जैसी बताया है।रिपोर्ट में गुरुग्राम निवासी शेख इरशाद मंसूरी का भी उल्लेख है, जिन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उनके चेहरे और शरीर में कई छर्रे धंस गए थे। उनका इलाज अस्पताल में किया गया, जहां कुछ छर्रे निकाले गए, जबकि कुछ शरीर में ही छोड़ने पड़े। अस्पताल के एक अधिकारी ने भी पुष्टि की कि उनकी चोटें छोटे छर्रों जैसे कणों से हुई थीं, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे बंदूक से दागे गए थे या नहीं।उधर, दिल्ली पुलिस ने इन सभी आरोपों को भ्रामक बताते हुए कहा कि उसके पास पैलेट गन मौजूद ही नहीं थी। वहीं संसद में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान किसी प्रकार की गोली नहीं चलाई गई और केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों पर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की गई।
दिल्ली प्रदर्शन में पैलेट गन के इस्तेमाल का दावा, विशेषज्ञों ने घायलों की चोटों पर उठाए सवाल
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