यमन में एक बार फिर तेज होती सैन्य गतिविधियों ने मानवीय संकट को गहरा कर दिया है। जुलाई से अब तक कम से कम 76 हजार लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के मुताबिक, हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और आने वाले दिनों में विस्थापित लोगों की संख्या और बढ़ सकती है।
कुछ ही दिनों में तेजी से बढ़ा विस्थापन
यमन में हालिया संघर्ष के कारण लोगों के पलायन की रफ्तार बेहद तेजी से बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, कुछ दिन पहले तक विस्थापित लोगों की संख्या करीब 46 हजार थी, जो अब बढ़कर कम से कम 76 हजार हो गई है। संगठन ने इसे तेजी से बिगड़ता विस्थापन संकट बताया है।
IOM के मुताबिक, पश्चिमी तट और दक्षिणी ताइज के इलाकों में संघर्ष का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। ताइज में ही करीब 8,300 परिवारों यानी लगभग 50 हजार लोगों के विस्थापित होने की जानकारी सामने आई है। कई परिवार रातोंरात अपने घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में निकल रहे हैं।
पश्चिमी तट पर संघर्ष ने बढ़ाई मुश्किल
यमन के पश्चिमी तट पर हालात विशेष रूप से गंभीर बने हुए हैं। हाल के दिनों में हूती लड़ाकों और सरकार समर्थक बलों के बीच संघर्ष तेज हुआ है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मोखा शहर के आसपास भी सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं।
संयुक्त राष्ट्र के यमन मामलों के विशेष दूत हांस ग्रुंडबर्ग ने चेतावनी दी है कि देश में 2022 में हुए युद्धविराम के बाद बड़े पैमाने पर संघर्ष में लौटने का खतरा अब वास्तविकता बनता दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक कई मोर्चों पर लड़ाई तेज हुई है और इसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से तत्काल सैन्य गतिविधियां रोकने और अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ने कहा कि नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा हर स्थिति में सुनिश्चित की जानी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा है कि सभी पक्ष अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करें और मानवीय सहायता पहुंचाने में बाधा न डालें। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, लगातार सैन्य escalation यमन के लिए राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।
विस्थापित परिवारों के सामने राहत का संकट
घर छोड़ने वाले परिवारों के सामने सिर्फ सुरक्षित स्थान खोजने की चुनौती नहीं है, बल्कि भोजन, पानी, आश्रय और स्वास्थ्य सुविधाओं की भी गंभीर कमी है। कई परिवार पहले भी यमन के लंबे संघर्ष के दौरान विस्थापन झेल चुके हैं।
IOM के अनुसार, विस्थापित लोगों की जरूरतें उपलब्ध राहत क्षमता से कहीं अधिक हैं। संगठन की टीमें प्रभावित इलाकों में आश्रय सामग्री, स्वच्छता किट और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन तेजी से बढ़ती जरूरतों के कारण सहायता अपर्याप्त साबित हो रही है।
यमन में फिर बड़े मानवीय संकट का खतरा
यमन पहले ही एक दशक से अधिक समय से संघर्ष और मानवीय संकट से जूझ रहा है। संयुक्त राष्ट्र लगातार चेतावनी देता रहा है कि बड़े पैमाने पर दोबारा युद्ध शुरू होने से देश में पहले से कमजोर मानवीय स्थिति और खराब हो सकती है।
ताजा हालात में हजारों परिवारों का विस्थापन इस आशंका को और मजबूत कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से बातचीत और राजनीतिक प्रक्रिया की ओर लौटने का आह्वान किया है, ताकि सैन्य टकराव को और फैलने से रोका जा सके और आम लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।
