नवाजुद्दीन सिद्दीकी आज हिंदी सिनेमा के उन बेहतरीन अभिनेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी अलग अदाकारी से इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई है। हालांकि इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं था। एक समय ऐसा था जब उन्हें फिल्मों में छोटे-छोटे किरदार ही मिलते थे और लंबे समय तक उन्हें अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। लेकिन एक फिल्म ने उनकी किस्मत का ऐसा रुख बदला कि देखते ही देखते उनके पास फिल्मों की स्क्रिप्ट की लाइन लग गई।
अभिनय की दुनिया में आने के लिए किया लंबा संघर्ष
नवाजुद्दीन सिद्दीकी उत्तर प्रदेश के बुढ़ाना से आते हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका झुकाव अभिनय की तरफ बढ़ा। उन्होंने थिएटर से अपने अभिनय की शुरुआत की और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से प्रशिक्षण हासिल किया।मुंबई पहुंचने के बाद उनका संघर्ष और भी मुश्किल हो गया। फिल्मों में काम पाने के लिए उन्हें कई ऑडिशन देने पड़े। शुरुआती दौर में उन्हें बेहद छोटे रोल मिले। कई फिल्मों में उनकी मौजूदगी कुछ ही मिनटों की रही, लेकिन उन्होंने कभी अपने सपने से समझौता नहीं किया।
छोटे किरदारों से बनाई अपनी अलग पहचान
नवाजुद्दीन ने अपने करियर के शुरुआती वर्षों में कई फिल्मों में छोटे किरदार निभाए। भले ही उन्हें स्क्रीन पर ज्यादा समय नहीं मिलता था, लेकिन उनकी अदाकारी धीरे-धीरे लोगों का ध्यान खींचने लगी।समय के साथ उन्हें ऐसे किरदार मिलने लगे, जिनमें अभिनय की वास्तविक क्षमता दिखाने का मौका था। उनके काम को पसंद किया जाने लगा और इंडस्ट्री में भी उनकी प्रतिभा को गंभीरता से लिया जाने लगा
‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ ने बदल दिया पूरा करियर
साल 2012 में रिलीज हुई फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ नवाजुद्दीन सिद्दीकी के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। फिल्म में उन्होंने फैजल खान का किरदार निभाया था।उनका किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। उनकी संवाद अदायगी, अंदाज और किरदार को निभाने के तरीके ने उन्हें रातों-रात चर्चा में ला दिया। इस फिल्म के बाद लोगों को समझ आ गया कि नवाजुद्दीन सिर्फ छोटे रोल करने वाले अभिनेता नहीं, बल्कि किसी फिल्म को अपने दमदार अभिनय से संभालने की क्षमता रखने वाले कलाकार हैं।
फिल्म के बाद आए करीब 200 स्क्रिप्ट के ऑफर
‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के बाद नवाजुद्दीन के करियर में जबरदस्त बदलाव आया। उनके पास लगातार फिल्मों के ऑफर आने लगे। उन्होंने एक बातचीत में बताया था कि फिल्म के बाद उनके पास करीब 200 स्क्रिप्ट आई थीं।हालांकि उन्होंने हर फिल्म को स्वीकार नहीं किया। नवाजुद्दीन के लिए सिर्फ ज्यादा फिल्में करना महत्वपूर्ण नहीं था, बल्कि वह ऐसे किरदार चुनना चाहते थे, जो उनके अभिनय को एक नई पहचान दे सकें।यही वजह रही कि उन्होंने कई फिल्मों को मना कर दिया। वह जानते थे कि एक गलत फिल्म उनके करियर की दिशा को प्रभावित कर सकती है, इसलिए उन्होंने स्क्रिप्ट और किरदार को प्राथमिकता दी।
इसके बाद लगातार मजबूत होते गए किरदार
‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ की सफलता के बाद नवाजुद्दीन ने कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। ‘द लंचबॉक्स’, ‘मांझी: द माउंटेन मैन’, ‘रमन राघव 2.0’, ‘मंटो’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता का अलग-अलग अंदाज दिखाया।उनकी खासियत यही रही कि उन्होंने खुद को किसी एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं किया। कभी गंभीर भूमिका, कभी खतरनाक किरदार तो कभी भावुक और साधारण इंसान—उन्होंने हर भूमिका को अपने अंदाज में जीवंत किया।
संघर्ष ने बनाया आज का नवाजुद्दीन
नवाजुद्दीन सिद्दीकी की कहानी बताती है कि सफलता हमेशा तुरंत नहीं मिलती। कई साल तक छोटे रोल और रिजेक्शन झेलने के बाद उन्हें ऐसा मौका मिला, जिसने उनकी पूरी पहचान बदल दी।’गैंग्स ऑफ वासेपुर’ उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि वह मोड़ था जिसने उनके करियर को नई दिशा दी। करीब 200 स्क्रिप्ट के ऑफर आने के बावजूद उन्होंने सोच-समझकर फिल्मों का चुनाव किया और धीरे-धीरे खुद को बॉलीवुड के सबसे भरोसेमंद अभिनेताओं में स्थापित कर लिया।
