पूर्व केंद्रीय मंत्री और लंबे समय तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की आलोचना करने वाले यशवंत सिन्हा का रुख इस बार बदला हुआ नजर आया। हालिया BRICS शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुई कूटनीतिक पहल की उन्होंने सराहना की। सिन्हा ने सम्मेलन की सफलता पर संतोष जताते हुए भारत की विदेश नीति और वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका को सकारात्मक नजरिए से देखा।
उनके इस बदले हुए रुख को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यशवंत सिन्हा अतीत में मोदी सरकार की आर्थिक और राजनीतिक नीतियों पर खुलकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में उनका सरकार के किसी बड़े कूटनीतिक प्रयास की तारीफ करना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
BRICS में भारत की भूमिका की तारीफ
यशवंत सिन्हा ने BRICS सम्मेलन के दौरान भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, जिस तरह भारत ने इस मंच पर अपनी स्थिति को मजबूती से रखा, वह देश की बढ़ती कूटनीतिक क्षमता को दर्शाता है।
भारत BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों के जरिए वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने और विभिन्न देशों के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर देता रहा है। ऐसे में सिन्हा की टिप्पणी को इसी व्यापक कूटनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।
चीन को लेकर क्या बोले यशवंत सिन्हा?
भारत-चीन संबंधों को लेकर भी यशवंत सिन्हा ने सकारात्मक संकेत दिया। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रुख पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि “चीन का गिलास आधा भरा हुआ है।” इस टिप्पणी का संकेत भारत-चीन संबंधों में पूरी तरह निराश होने के बजाय संभावनाओं और सुधार की गुंजाइश देखने से जुड़ा माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण बातचीत हुई हैं। दोनों पक्षों ने मतभेदों को विवाद में बदलने से रोकने और संबंधों को स्थिर दिशा देने की जरूरत पर जोर दिया है। भारत ने विशेष रूप से सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
पहले मोदी सरकार की आलोचना करते रहे हैं सिन्हा
यशवंत सिन्हा का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है। वह केंद्र सरकार में वित्त और विदेश जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। मोदी सरकार के शुरुआती वर्षों के दौरान उन्होंने आर्थिक नीतियों, नोटबंदी और GST जैसे मुद्दों पर तीखी आलोचना की थी।
बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से अलग होकर अपनी राजनीतिक राह चुनी। इसी वजह से मौजूदा सरकार की किसी प्रमुख उपलब्धि की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करने वाला उनका बयान राजनीतिक रूप से खास महत्व रखता है।
भारत-चीन रिश्तों में सुधार की उम्मीद
भारत और चीन के संबंधों में सीमा विवाद के कारण लंबे समय तक तनाव रहा है। हालांकि, पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच संवाद और संपर्क बढ़ाने के प्रयास हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी चीन के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और हितों को ध्यान में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
ऐसे माहौल में सिन्हा का चीन को लेकर “गिलास आधा भरा हुआ” कहना इस बात का संकेत माना जा सकता है कि वह दोनों देशों के रिश्तों में आगे सुधार की संभावना देखते हैं।
बदले रुख के राजनीतिक मायने
यशवंत सिन्हा के ताजा बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है। हालांकि, इसे मोदी सरकार के प्रति उनके पूरे राजनीतिक रुख में स्थायी बदलाव के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी। फिलहाल इतना जरूर है कि उन्होंने BRICS में भारत की भूमिका और सरकार की कूटनीतिक कोशिशों की सराहना की है।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका मजबूत करने के साथ-साथ चीन और अन्य बड़ी शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में सिन्हा का सकारात्मक आकलन सरकार की विदेश नीति को लेकर एक अलग नजरिया जरूर पेश करता है।
