Thursday, October 8, 2026
Thursday, October 8, 2026
Home मनोरंजनदो बार ठुकराए जाने के बाद ऐसे मिला श्रीराम बनने का मौका, लक्ष्मण के रोल से इसलिए रह गए दूर

दो बार ठुकराए जाने के बाद ऐसे मिला श्रीराम बनने का मौका, लक्ष्मण के रोल से इसलिए रह गए दूर

by Sagar Sharma
0 comments

टीवी की दुनिया में कुछ किरदार ऐसे होते हैं, जो अभिनेता की पहचान हमेशा के लिए बदल देते हैं। ‘रामायण’ में भगवान श्रीराम का किरदार भी ऐसा ही रहा है। इस भूमिका को निभाने वाले अभिनेता ने हाल ही में अपने उस दौर को याद किया, जब उन्हें इसी शो में काम करने के लिए दो बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था। दिलचस्प बात यह है कि जिस भूमिका के लिए उन्होंने शुरुआत में कोशिश की थी, वह उन्हें नहीं मिली। इसके बाद उन्हें श्रीराम का किरदार निभाने का अवसर मिला और यही भूमिका उनके करियर की सबसे यादगार पहचान बन गई।

पहले लक्ष्मण के किरदार के लिए दिया था ऑडिशन

अभिनेता ने बताया कि ‘रामायण’ के लिए उनका पहला प्रयास लक्ष्मण के किरदार को पाने का था। उन्होंने इसके लिए ऑडिशन दिया, लेकिन चयन नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने दोबारा कोशिश की और एक बार फिर उन्हें रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। लगातार दो बार मौका हाथ से निकलने के बाद शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि आगे चलकर इसी प्रोजेक्ट में उन्हें मुख्य भूमिका मिल सकती है।

उनकी कहानी में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब उन्हें श्रीराम के किरदार के लिए चुना गया। यानी जिस शो में उन्हें शुरुआत में जगह नहीं मिल रही थी, उसी शो ने बाद में उन्हें सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक दे दी।

कद की वजह से लक्ष्मण का रोल नहीं मिला

अभिनेता के मुताबिक लक्ष्मण के किरदार के लिए उनके चयन में एक दिलचस्प वजह सामने आई थी। उन्होंने बताया कि वह उस अभिनेता से करीब दो इंच लंबे थे, जिसे राम के किरदार के लिए चुना गया था। राम और लक्ष्मण की जोड़ी को पर्दे पर एक खास शारीरिक संतुलन के साथ दिखाने की जरूरत थी। इसी वजह से उनके लिए लक्ष्मण का किरदार उपयुक्त नहीं माना गया।हालांकि, यही परिस्थिति बाद में उनके लिए वरदान साबित हुई। लक्ष्मण की भूमिका नहीं मिलने के बाद जब श्रीराम के किरदार के लिए मौका आया, तो उन्होंने इसे पूरी गंभीरता से स्वीकार किया।

श्रीराम का किरदार बना करियर की पहचान

पौराणिक किरदार निभाना किसी भी अभिनेता के लिए आसान नहीं होता। इसमें केवल संवाद बोलना ही नहीं, बल्कि चेहरे के भाव, चाल-ढाल, व्यक्तित्व और स्क्रीन प्रेजेंस पर भी विशेष ध्यान देना पड़ता है। श्रीराम की भूमिका में अभिनेता को मर्यादा, शांति और गंभीरता का संतुलन दिखाना था।

इस किरदार ने दर्शकों के बीच उन्हें अलग पहचान दिलाई। समय के साथ उनकी स्क्रीन पर मौजूदगी को श्रीराम की छवि से जोड़कर देखा जाने लगा। यही वजह है कि आज भी ‘रामायण’ से जुड़ी चर्चा में उनके निभाए श्रीराम के किरदार का जिक्र प्रमुखता से होता है।

रिजेक्शन से सफलता तक का सफर

उनकी यह कहानी यह भी दिखाती है कि किसी ऑडिशन में असफल होना हमेशा अंतिम जवाब नहीं होता। दो बार रिजेक्ट होने के बाद भी उन्होंने उसी प्रोजेक्ट से अपना रिश्ता नहीं खोया। आखिरकार परिस्थितियां बदलीं और उन्हें ऐसा किरदार मिला, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी।

लक्ष्मण का किरदार न मिलना उस समय भले ही निराशाजनक रहा हो, लेकिन बाद में वही फैसला उनके लिए एक बड़े अवसर में बदल गया। श्रीराम की भूमिका ने उन्हें दर्शकों के बीच ऐसी पहचान दी, जिसे लंबे समय बाद भी याद किया जाता है।

Author

You may also like