Saturday, September 12, 2026
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सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता पर पीएम मोदी सख्त, सचिवों से पूछा- क्या चौथे स्तर के ऑडिट की जरूरत है?

by Sagar Sharma
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता और निर्माण कार्यों में निगरानी को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के सामने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को हुई मासिक प्रगति बैठक में प्रधानमंत्री ने केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ सचिवों के साथ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब पहले से थर्ड-पार्टी ऑडिट की व्यवस्था है, तो क्या अब फोर्थ-पार्टी ऑडिट की जरूरत पड़ रही है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि परियोजनाओं में गुणवत्ता से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

30 हजार करोड़ रुपये से अधिक की छह परियोजनाओं की समीक्षा

प्रगति बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्र से जुड़ी छह बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं और इनकी कुल अनुमानित लागत 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से परियोजनाओं की प्रगति के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देने को कहा।

गुणवत्ता में कमी पर जताई नाराजगी

बैठक में सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से जुड़ी रिपोर्टों पर प्रधानमंत्री ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को यह संदेश दिया कि केवल परियोजना को समय पर पूरा करना पर्याप्त नहीं है। निर्माण कार्य लंबे समय तक टिकाऊ और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने मौजूदा थर्ड-पार्टी ऑडिट व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उनका यह सवाल इस बात की ओर संकेत करता है कि यदि निगरानी की मौजूदा व्यवस्था के बावजूद निर्माण की गुणवत्ता में खामियां सामने आती हैं, तो जवाबदेही तय करने के लिए व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

तेजी के साथ गुणवत्ता भी जरूरी

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति के साथ गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने मंत्रालयों, राज्य सरकारों और परियोजनाओं को लागू करने वाली एजेंसियों से आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाने तथा हर चरण पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने और निगरानी मजबूत करने का आह्वान किया।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी धन से तैयार होने वाली सड़क, रेलवे, बिजली और अन्य सार्वजनिक परियोजनाएं केवल कागज पर पूरी न हों, बल्कि जमीन पर भी निर्धारित मानकों के अनुसार प्रभावी और टिकाऊ साबित हों।

परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों में नहीं, एकीकृत रूप से देखने पर जोर

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों, पैकेज या सड़क के छोटे-छोटे सेक्शन के रूप में देखने के बजाय एक एकीकृत परियोजना के तौर पर मॉनिटर किया जाना चाहिए। इससे परियोजना की वास्तविक प्रगति और अंतिम परिणाम का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।

बिजली क्षेत्र की एक परियोजना की समीक्षा के दौरान भी प्रधानमंत्री ने इसी तरह के समग्र दृष्टिकोण पर जोर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि केवल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके साथ पर्याप्त ट्रांसमिशन क्षमता भी विकसित करनी होगी। यानी परियोजना के एक हिस्से के पूरा होने से तभी वास्तविक लाभ मिलेगा, जब उससे जुड़े दूसरे जरूरी हिस्से भी तैयार हों।

साइबर फ्रॉड पर भी हुई चर्चा

प्रगति बैठक में साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों की भी समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम के लिए प्रशिक्षण, जागरूकता और शिक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने खास तौर पर वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं और अन्य संवेदनशील वर्गों के बीच लगातार जागरूकता अभियान चलाने की बात कही।

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि लोगों को साइबर ठगी के सामान्य तरीकों, खतरे के संकेतों और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के बारे में लगातार जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही साइबर अपराध से निपटने वाले कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

सरकारी परियोजनाओं में जवाबदेही पर फोकस

प्रधानमंत्री की टिप्पणी को सार्वजनिक परियोजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही को लेकर सरकार की सख्ती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। बड़ी परियोजनाओं में भारी मात्रा में सार्वजनिक धन खर्च होता है, ऐसे में उनका समय पर पूरा होना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी यह भी है कि निर्माण की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहे।

बैठक में दिए गए संदेश का मूल जोर यही रहा कि तेज विकास और बेहतर गुणवत्ता एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि साथ-साथ चलने वाले लक्ष्य हैं। सरकार की ओर से परियोजनाओं की निगरानी, आधुनिक तकनीक और गुणवत्ता आश्वासन को मजबूत करने पर जोर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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