भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले, 14 अगस्त को देश में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मनाया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1947 के विभाजन के दौरान अपना घर-परिवार और अपनों को खोने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए विभाजन की पीड़ा को याद किया और उन लोगों के साहस को नमन किया, जिन्होंने उस कठिन दौर का सामना किया। प्रधानमंत्री के संदेश की पुष्टि प्रेस सूचना ब्यूरो की आधिकारिक जानकारी से भी होती है।
बंटवारे का दौर बेहद दर्दनाक था
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विभाजन का वह दौर बेहद डरावना और पीड़ादायक था। 1947 में देश के विभाजन के साथ लाखों लोगों को अचानक अपने घर, जमीन और पुरखों की विरासत छोड़कर दूसरी जगह जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। कई परिवार बिछड़ गए, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने हिंसा और संघर्ष के बीच अपने प्रियजनों को खो दिया।
विभाजन केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं के बदलने की घटना नहीं थी, बल्कि इसने करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया। लोगों को अपनी जड़ों से दूर होना पड़ा और अनिश्चित परिस्थितियों में नए सिरे से जीवन शुरू करना पड़ा। इस मानवीय त्रासदी की याद आज भी उन परिवारों और पीढ़ियों की स्मृतियों में मौजूद है, जिन्होंने विस्थापन का दर्द झेला।
मुश्किलों के बावजूद नहीं हारी हिम्मत
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में विभाजन पीड़ितों के साहस और संघर्ष को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी विपत्ति के बावजूद लोगों ने हार नहीं मानी। जिन लोगों को सब कुछ पीछे छोड़कर नई जगह पर जाना पड़ा, उन्होंने शून्य से अपनी जिंदगी शुरू की और मेहनत के बल पर अपने परिवारों का भविष्य बनाया।
विभाजन के बाद भारत के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचे शरणार्थियों ने कठिन परिस्थितियों के बीच अपने जीवन को दोबारा खड़ा किया। व्यापार, शिक्षा, उद्योग, कृषि और विभिन्न क्षेत्रों में उन्होंने योगदान दिया। उनके संघर्ष और सफलता की कहानियां आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस और दृढ़ता की मिसाल बनीं।
भाईचारे और सौहार्द का दिया संदेश
पीएम मोदी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उससे सीख लेने का दिन बताया। उन्होंने देशवासियों से आपसी भाईचारा, मेल-मिलाप और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का संकल्प लेने की अपील की।
प्रधानमंत्री का संदेश था कि इतिहास की इस पीड़ा को याद करते हुए देश को ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए एकता और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करना चाहिए। विभाजन की त्रासदी यह याद दिलाती है कि समाज में आपसी विश्वास, शांति और सद्भाव कितने महत्वपूर्ण हैं।
14 अगस्त को क्यों मनाया जाता है यह दिवस?
भारत सरकार ने 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा 2021 में की थी। इसका उद्देश्य 1947 के विभाजन के दौरान पीड़ा, विस्थापन और जान गंवाने वाले लोगों को याद करना है। सरकारी प्रकाशनों में भी इस दिन को उस मानवीय त्रासदी की स्मृति से जोड़ा गया है, जिसमें बड़े पैमाने पर लोगों को जबरन पलायन करना पड़ा और परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले यह दिवस देश को याद दिलाता है कि आजादी की कहानी केवल उत्सव की कहानी नहीं है। इसके साथ विभाजन का एक ऐसा अध्याय भी जुड़ा है, जिसने असंख्य परिवारों के जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने इसी इतिहास को याद करते हुए विभाजन से प्रभावित लोगों के साहस को नमन किया और देशवासियों से एकता, भाईचारे तथा सौहार्द को मजबूत करने का आह्वान किया। यह संदेश आज की पीढ़ी के लिए भी महत्वपूर्ण है कि अतीत की त्रासदियों को याद करते हुए भविष्य को अधिक शांतिपूर्ण, मजबूत और एकजुट बनाने की दिशा में आगे बढ़ा जाए।
