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NEET 2026: 2020 में 600 अंक, फिर माता-पिता को खोया; 6 साल बाद अभिषेक ने हासिल की AIR 422

by Sagar Sharma
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कुछ कहानियां सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि मुश्किल हालात के बीच हार न मानने की होती हैं। असम के अभिषेक कुमार अग्रवाल की कहानी भी ऐसी ही है। करीब छह साल पहले NEET में 600 अंक हासिल करने के बावजूद मेडिकल सीट नहीं मिलने के बाद उनका डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया था। लेकिन लंबा अंतराल, पारिवारिक जिम्मेदारियां और माता-पिता को खोने के दर्द के बावजूद उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की और NEET UG 2026 में 673 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 422 प्राप्त की।

2020 में 600 अंक, फिर भी नहीं मिली MBBS सीट

अभिषेक करीब सात साल पहले डॉक्टर बनने का सपना लेकर असम से कोटा पहुंचे थे। 2020 में उन्होंने अपने पहले NEET प्रयास में 600 अंक हासिल किए। हालांकि, असम में जन्म और राजस्थान में पढ़ाई के कारण उनके सामने डोमिसाइल से जुड़ी दिक्कतें आ गईं। राज्य कोटे का लाभ नहीं मिलने के कारण उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट नहीं मिल सकी। ऑल इंडिया कोटे से भी उन्हें सरकारी MBBS सीट नहीं मिल पाई।

माता-पिता को खोने के बाद बढ़ गईं जिम्मेदारियां

सीट न मिलने के बाद कोरोना महामारी के दौरान अभिषेक असम लौट गए। उनके पिता सुशील कुमार अग्रवाल का तिनसुकिया में कारोबार था, जिसकी जिम्मेदारी भी उन्होंने संभालनी शुरू कर दी। इसी बीच 2021 में बीमारी के चलते उनके पिता का निधन हो गया। परिवार इस सदमे से उबर पाता, उससे पहले नवंबर 2024 में उनकी मां का भी दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया

माता-पिता के जाने के बाद अभिषेक के सामने परिवार और भविष्य दोनों की जिम्मेदारियां थीं। ऐसे समय में उनकी सात बहनें और जीजाओं ने उनका साथ दिया और उन्हें दोबारा मेडिकल की तैयारी शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

पांच साल बाद फिर उठाई किताबें

फरवरी 2025 में अभिषेक ने दोबारा पढ़ाई शुरू की और मई में कोटा लौटकर NEET की तैयारी में जुट गए। लंबे गैप के बाद उन्होंने पूरी मेहनत से तैयारी की। इसका नतीजा NEET UG 2026 में सामने आया, जहां उन्होंने 673 अंक के साथ AIR 422 हासिल की।अब अभिषेक का लक्ष्य किसी प्रतिष्ठित AIIMS से MBBS करना और आगे चलकर न्यूरोसर्जन बनना है।

करीब पांच साल के ब्रेक के बाद दोबारा पढ़ाई शुरू करना उनके लिए आसान नहीं था। बदलते सिलेबस, लंबे समय तक पढ़ाई से दूर रहने और निजी जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी को लगातार जारी रखा

बहनों के प्रोत्साहन और आर्थिक सहयोग ने भी उनके इस सफर में अहम भूमिका निभाई। परिवार ने उन्हें दोबारा अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का मौका दिया, जिसका नतीजा अब देश की शीर्ष रैंक में दिखाई दे रहा है।

अब अभिषेक का लक्ष्य किसी प्रतिष्ठित AIIMS से MBBS करना और आगे चलकर न्यूरोसर्जन बनना है। उनकी कहानी उन छात्रों के लिए मिसाल बन गई है, जिन्हें किसी कारण से अपने सपने को बीच में रोकना पड़ा है।

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