Tuesday, July 28, 2026
Tuesday, July 28, 2026
Home देशमॉनसून सत्र की शुरुआत ही हंगामे से, राहुल और अखिलेश की मुलाकात आगे क्या गुल खिलाएगी?

मॉनसून सत्र की शुरुआत ही हंगामे से, राहुल और अखिलेश की मुलाकात आगे क्या गुल खिलाएगी?

by Narendra Hazari
0 comments

संसद के लिहाज से भी राहुल गांधी और अखिलेश यादव की मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है. कांग्रेस के बाद समाजवादी पार्टी ही INDIA अलायंस की सबसे बड़ी दूसरी पार्टी है.

मॉनसून सत्र का पहला दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया. इसका अंदाजा उसी वक्त लग गया था, जब INDIA गठबंधन की बैठक के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव और राहुल गांधी की मुलाकात हुई. यह इन दोनों की पहली ऐसी बैठक हुई है, जिसकी जानकारी मीडिया को लगी है. संसद के इस मॉनसून सत्र और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह बैठक बहुत अहम मानी जा रही है. संसद भवन में हुई इस बैठक में प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं. इसी की वजह से यह कहा जा रहा है कि इस बैठक में उत्तर प्रदेश को लेकर बातचीत हुई है. हालांकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी इस मुलाकात को ज्यादा तूल नहीं देना चाहते हैं.

वैसे अखिलेश यादव पहले ही एनडीटीवी से कह चुके हैं कि उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन पहले से ही है और इस बार का विधानसभा चुनाव भी गठबंधन की तरफ से मजबूती से लड़ा जाएगा. मगर संसद के लिहाज से भी राहुल गांधी और अखिलेश यादव की मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है. कांग्रेस के बाद समाजवादी पार्टी ही INDIA अलायंस की सबसे बड़ी दूसरी पार्टी है. संसद में विपक्ष की रणनीति एकदम साफ है और वह सरकार को राम मंदिर में चंदा चोरी और नीट पेपर लीक पर घेरना चाहता है. इस बार इन दोनों मुद्दों पर विपक्ष एकजुट है.

खुलकर CJP के प्रदर्शन के समर्थन में आई समाजवादी पार्टी

समाजवादी पार्टी तो जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के समर्थन में खुल कर सामने आ गई है.सपा सांसदों का एक समूह ने बैनर हाथ में लेकर संसद भवन से जंतर मंतर तक मार्च किया और जब डिंपल यादव और अन्य सांसद वहां पहुंचे तो उन्हें थोड़ी देर के लिए हिरासत में भी लिया गया. कहने का मतलब है कि विपक्ष इस मॉनसून सत्र में सरकार पर दबाव बनाने से चूकना नहीं चाहता. अभी तो फिलहाल नीट पेपर लीक का मुद्दा चल रहा है, जिसके लिए संसद के दोनों सदनों में काम रोको प्रस्ताव भी विपक्ष के तरफ से दिया गया.

कौन से बिल पर होगी विपक्ष की एकता की परीक्षा

मॉनसून सत्र का पहला दिन भले ही हंगामे के भेंट चढ़ गया हो, मगर उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार और विपक्ष के बीच मुद्दों पर कुछ सहमति बनेगी और संसद का कामकाज सुचारू रूप से चलेगा. विपक्ष राम मंदिर में चंदा चोरी और पेपर लीक पर बहस चाहता है और यदि संसद की कार्य मंत्रणा समिति में कोई सहमति बन जाए तो बात बन सकती है.सरकार ने भले ही अपने एजेंडा में परिसीमन बिल नहीं रखा है, मगर जिस दिन सरकार उसे लाने की कोशिश करेगी उसी दिन विपक्षी एकता की परीक्षा होगी.

You may also like