Thursday, October 29, 2026
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LTCG और STT टैक्स पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बड़ा संकेत, बजट से पहले फूंक-फूंककर उठाएंगी कदम

by Rohan Gupta
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नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगामी केंद्रीय बजट से पहले शेयर बाजार से जुड़े टैक्स नियमों में बदलाव को लेकर सावधानी बरतने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स को लेकर कई लोगों की राय सामने आ रही है और सरकार इस मुद्दे पर सोच-समझकर आगे बढ़ना चाहेगी।

13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 8वें Bloomberg New Economy Forum में सीतारमण ने LTCG टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को लेकर चल रही बहस पर बात की। बाजार के कुछ प्रतिभागियों का तर्क है कि इन दोनों टैक्सों के बीच दोहराव है और इनमें से किसी एक को बनाए रखने पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, सरकार ने अभी तक इनमें से किसी टैक्स को हटाने या उसकी दर बदलने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है।

LTCG और STT को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

LTCG यानी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स शेयर या अन्य निवेश को निर्धारित अवधि तक रखने के बाद बेचने पर होने वाले मुनाफे पर लागू होता है। वहीं, STT यानी सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स शेयर बाजार में कुछ निर्धारित सिक्योरिटीज के लेनदेन पर लगाया जाता है।

दोनों टैक्सों के लागू होने के कारण निवेशकों की लागत और टैक्स के बाद मिलने वाले रिटर्न पर असर पड़ता है। इसी वजह से बाजार से जुड़े कुछ विशेषज्ञ LTCG और STT की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग कर रहे हैं।

हालांकि, दोनों टैक्स अलग-अलग आधार पर लगाए जाते हैं। इसलिए इन्हें हटाने या इनमें बदलाव करने का फैसला सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं और राजस्व पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव पर निर्भर करेगा।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार पर दबाव

Business Today की रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने वर्ष 2026 में अब तक भारतीय बाजार से 3,07,719 करोड़ रुपये की निकासी की है। इससे पहले वर्ष 2025 में भी विदेशी निवेशकों ने 1,66,286 करोड़ रुपये निकाले थे।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वर्ष 2024 में विदेशी इक्विटी निवेश का शुद्ध प्रवाह लगभग सपाट रहा था, जिसमें केवल 425 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार की धारणा पर दबाव बनाया है। ऐसे माहौल में LTCG और STT जैसे टैक्स संबंधी मुद्दे निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।

SBI Research ने LTCG टैक्स हटाने का दिया सुझाव

SBI Research ने अपनी हालिया Ecowrap रिपोर्ट में इक्विटी निवेश पर LTCG टैक्स समाप्त करने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट में निवेश की होल्डिंग अवधि को मौजूदा एक वर्ष से बढ़ाकर दो से तीन वर्ष करने की सिफारिश भी की गई है।

इस प्रस्ताव का उद्देश्य अल्पकालिक पूंजी के प्रवाह को नियंत्रित करने और निवेशकों को लंबी अवधि तक बाजार में बने रहने के लिए प्रोत्साहित करने में मदद करना है।

Business Today की रिपोर्ट के मुताबिक, SBI Research ने वर्ष 2021 से सितंबर 2026 के बीच इक्विटी बाजार से कुल 3.51 लाख करोड़ रुपये के FPI आउटफ्लो का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी निवेशकों के लगातार बाहर निकलने के बीच पूंजी प्रवाह से जुड़ी संरचनात्मक चुनौतियों पर ध्यान देने की जरूरत है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि LTCG टैक्स हटाने का सुझाव SBI Research की सिफारिश है, सरकार का घोषित फैसला नहीं।

रुपये की अस्थिरता पर भी सरकार की नजर

वित्त मंत्री ने रुपये की अस्थिरता और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले उसकी चाल को भी एक चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि बाहरी परिस्थितियों का भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार की धारणा पर असर पड़ रहा है।

सीतारमण ने राजकोषीय अनुशासन को लेकर निवेशकों की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि सरकार वित्तीय प्रबंधन में सतर्क रही है। उन्होंने यह भरोसा भी जताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए आगे और कदम उठा सकता है।

निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब?

फिलहाल निवेशकों को LTCG या STT में तत्काल बदलाव की उम्मीद को आधिकारिक घोषणा नहीं मानना चाहिए। SBI Research ने LTCG टैक्स हटाने का सुझाव दिया है, जबकि वित्त मंत्री ने इस विषय पर सावधानी से आगे बढ़ने की बात कही है।

अगले केंद्रीय बजट में इन टैक्सों को लेकर क्या फैसला होता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। तब तक निवेशकों को मौजूदा टैक्स नियमों के आधार पर ही अपने निवेश और ट्रेडिंग से जुड़े फैसले लेने चाहिए।

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