Wednesday, October 28, 2026
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चारा घोटाले में लालू यादव की कानूनी मुश्किलों पर अहम सुनवाई, झारखंड हाईकोर्ट में रोजाना होगी बहस

by Sagar Sharma
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रांची: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव से जुड़े चारा घोटाले के देवघर कोषागार मामले में झारखंड हाईकोर्ट में 27 अक्टूबर 2026 से नियमित सुनवाई शुरू हो रही है। अदालत में लालू यादव की सजा के खिलाफ दायर अपील के साथ अन्य संबंधित अपीलों पर भी सुनवाई की जाएगी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही हाईकोर्ट से अपीलों का निपटारा तेजी से करने का अनुरोध किया था।

छह महीने में सुनवाई पूरी करने की है चुनौती

चारा घोटाले से जुड़े इस मामले में लंबे समय से लंबित अपीलों पर अब सुनवाई तेज करने की तैयारी है। 14 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट से अपीलों पर शीघ्र सुनवाई करने और अपने आदेश की तारीख से छह महीने के भीतर उनका निपटारा करने का अनुरोध किया था। इस समयसीमा के अनुसार जनवरी 2027 के मध्य तक मामले में निर्णय की दिशा में आगे बढ़ने की अपेक्षा है।

हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू होने से इस मामले की कानूनी प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है। अदालत के सामने मुख्य सवाल लालू यादव की दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से सजा बढ़ाने की मांग से संबंधित है। दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद ही अदालत आगे का निर्णय करेगी।

देवघर कोषागार से 89.27 लाख रुपये की अवैध निकासी का मामला

देवघर कोषागार प्रकरण चारा घोटाले के उन मामलों में शामिल है, जिनमें सरकारी धन की कथित हेराफेरी और पशुपालन विभाग के खर्चों में अनियमितताओं की जांच की गई थी। इस मामले में 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से लगभग 89.27 लाख रुपये की अवैध निकासी का आरोप था।

लालू प्रसाद यादव को इस मामले में 2017 में विशेष CBI अदालत ने दोषी ठहराया था और साढ़े तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्होंने दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की। जुलाई 2019 में झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी सजा निलंबित करते हुए जमानत प्रदान की थी।

यह मामला उस व्यापक चारा घोटाले का हिस्सा है, जिसमें अविभाजित बिहार के सरकारी खजाने से पशुपालन विभाग के नाम पर बड़े पैमाने पर धन निकाले जाने के आरोप सामने आए थे। अलग-अलग कोषागारों से संबंधित मामलों में जांच और मुकदमे चले, जिनमें लालू यादव को कई मामलों में दोषी ठहराया गया।

CBI ने सजा बढ़ाने की मांग भी उठाई

इस मामले में केवल लालू यादव की अपील ही महत्वपूर्ण नहीं है। CBI ने भी सजा बढ़ाने की मांग करते हुए अपील की है। जांच एजेंसी का पक्ष रहा है कि आर्थिक अपराध की गंभीरता और सरकारी पद पर रहते हुए किए गए अपराध को ध्यान में रखकर सजा पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।

दूसरी ओर, लालू यादव की ओर से उनके वकील अदालत में दोषसिद्धि और सजा से संबंधित कानूनी दलीलें पेश करेंगे। ऐसे में हाईकोर्ट को दोनों पक्षों के तर्कों, निचली अदालत के फैसले और मामले के रिकॉर्ड का परीक्षण करना होगा। अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही आएगा।

बड़े रिकॉर्ड के कारण दस्तावेजों की तैयारी अहम

मामले की सुनवाई को प्रभावी बनाने के लिए निचली अदालत के विस्तृत रिकॉर्ड में से जरूरी दस्तावेजों की पहचान करने पर भी जोर दिया जा रहा है। पिछली सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं और CBI के वकीलों ने बहस के लिए पेपर बुक तैयार करने की जरूरत बताई थी।

रिकॉर्ड काफी बड़ा होने के कारण प्रत्येक पक्ष को सभी दस्तावेजों की हार्ड कॉपी उपलब्ध कराना व्यावहारिक नहीं माना गया। इसलिए वकीलों को जरूरी दस्तावेजों की पहचान करने और उनके निरीक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा गया। इसके बाद संबंधित कागजात की स्कैन प्रतियां उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा सकती है।

अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें

27 अक्टूबर से शुरू होने वाली नियमित सुनवाई इस मामले के लिए महत्वपूर्ण चरण है। इससे लालू यादव की अपील, CBI की सजा बढ़ाने संबंधी मांग और लंबे समय से लंबित कानूनी विवाद पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

हालांकि, नियमित सुनवाई शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत उसी दिन अंतिम फैसला सुना देगी। मामले में दलीलें, दस्तावेजों की जांच और अन्य न्यायिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हाईकोर्ट निर्धारित समयसीमा के भीतर अपीलों पर क्या निष्कर्ष निकालता है।

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