Wednesday, October 28, 2026
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दिल्ली में पशु आश्रय पर बुलडोजर कार्रवाई से मचा विवाद, CM रेखा गुप्ता ने जागृति मिश्रा को दिया ₹5 लाख का भरोसा

by Sagar Sharma
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राजधानी दिल्ली में बेसहारा और घायल पशुओं की देखभाल के लिए एनिमल शेल्टर तैयार कर रहीं पशु कल्याण कार्यकर्ता जागृति मिश्रा का मामला इन दिनों चर्चा में है। उनके निर्माणाधीन पशु आश्रय स्थल की चारदीवारी और निर्माण से जुड़े हिस्सों को कथित तौर पर तोड़े जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 25 अक्टूबर 2026 को जागृति मिश्रा से मुलाकात की और उन्हें हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने संबंधित जूनियर इंजीनियर के आचरण की जांच कराने, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करने और पशु आश्रय स्थल स्थापित करने में प्रशासनिक मदद देने के निर्देश भी दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला दिल्ली के कंझावला क्षेत्र के निजामपुर गांव से जुड़ा है। जागृति मिश्रा घायल, बेसहारा और लावारिस पशुओं की देखभाल के लिए एक एनिमल शेल्टर तैयार कर रही थीं। इस केंद्र का उद्देश्य जरूरतमंद पशुओं को सुरक्षित जगह उपलब्ध कराना और उनकी देखभाल के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित करना बताया गया है।

जागृति मिश्रा के अनुसार, निर्माण स्थल पर जेसीबी मशीन लेकर पहुंचे लोगों ने वहां बनी चारदीवारी और निर्माणाधीन ढांचे को नुकसान पहुंचाया। उनका आरोप है कि कार्रवाई से पहले उन्हें उचित सूचना या कानूनी नोटिस नहीं दिया गया। इस घटना के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों के व्यवहार पर सवाल उठाए। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मामला चर्चा में आया।

हालांकि, निर्माण स्थल की कानूनी स्थिति, कार्रवाई के पीछे प्रशासनिक कारणों और सभी संबंधित पक्षों की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।

रिश्वत मांगने और दबाव बनाने का भी आरोप

जागृति मिश्रा ने आरोप लगाया है कि पशु आश्रय स्थल का निर्माण रोकने के लिए उन पर दबाव बनाया गया था। सोशल मीडिया पर सामने आए उनके बयानों के मुताबिक, उन्होंने रिश्वत मांगने और स्थानीय स्तर पर धमकी दिए जाने के आरोप भी लगाए हैं। उनका दावा है कि निर्माण कार्य रोकने की कोशिशों के बाद परिसर में तोड़फोड़ की गई।

इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। इसलिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रिश्वत मांगने, धमकी देने या किसी अधिकारी द्वारा अधिकारों के दुरुपयोग के आरोपों को फिलहाल सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। संबंधित व्यक्तियों का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिए जांच और पुलिस कार्रवाई के निर्देश

मामले पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जागृति मिश्रा से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि पशु कल्याण के उनके प्रयासों में सरकार आवश्यक सहयोग करेगी। उन्होंने संबंधित जूनियर इंजीनियर के आचरण की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही पुलिस को मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने संबंधित पुलिस उपायुक्त को उन लोगों के खिलाफ शिकायत और कार्रवाई से जुड़े कदम उठाने को भी कहा, जिन पर जागृति मिश्रा को कथित तौर पर धमकाने या दबाव बनाने के आरोप हैं।

प्रशासनिक स्तर पर संबंधित जूनियर इंजीनियर से स्पष्टीकरण मांगने के लिए कारण बताओ नोटिस की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है। इन कदमों का उद्देश्य घटना के तथ्यों की जांच करना और यह पता लगाना है कि कार्रवाई के दौरान नियमों का पालन हुआ था या नहीं।

मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹5 लाख की आर्थिक सहायता

जागृति मिश्रा को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹5 लाख की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा, जिलाधिकारी को पशु आश्रय स्थल स्थापित करने में उनकी मदद करने के निर्देश दिए गए हैं।इस सहायता से संबंधित आश्रय स्थल के निर्माण और पशुओं की देखभाल से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, ₹5 लाख की राशि देने का आश्वासन दिया गया है; इसे राशि के वास्तविक हस्तांतरण की पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के उत्पीड़न और सरकारी अधिकारों के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

पशु कल्याण के काम में आने वाली चुनौतियां फिर चर्चा में

जागृति मिश्रा का मामला केवल निर्माणाधीन परिसर में हुई कथित तोड़फोड़ तक सीमित नहीं है। इसने घायल और बेसहारा पशुओं की देखभाल के लिए काम करने वाले लोगों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को भी चर्चा में ला दिया है।ऐसे आश्रय स्थलों को चलाने के लिए सुरक्षित जगह, पर्याप्त धन, पशु चिकित्सा सुविधाएं, भोजन, साफ-सफाई और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन जरूरी होता है। यदि निर्माण या जमीन से जुड़े विवाद सामने आते हैं, तो पशुओं की देखभाल की योजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि निर्माण स्थल पर कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई, क्या संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया और आरोपों में कितनी सच्चाई है। इन सवालों के जवाब जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही तय होंगे।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल मुख्यमंत्री की ओर से जांच, पुलिस कार्रवाई, सुरक्षा और आर्थिक सहायता से जुड़े निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी को पशु आश्रय स्थल स्थापित करने में सहयोग करने के लिए कहा गया है। आगे की स्थिति संबंधित अधिकारियों की जांच, पुलिस की कार्रवाई और निर्माण स्थल से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल पर निर्भर करेगी।

जागृति मिश्रा के आरोपों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय होना इस मामले में अहम होगा। साथ ही, पशु आश्रय स्थल की स्थापना में प्रशासनिक सहयोग कितना प्रभावी रहता है, यह भी देखना होगा। फिलहाल सरकार की ओर से मदद का आश्वासन दिया गया है, लेकिन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकेगा।

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